Thursday, August 4, 2022

"नागराज" आतंकवादियों का यमराज



Jai kishor Rankawat जी की कलम से

 नागराज से अपनेपन और जुड़ाव का एक कारण उसकी चिरपरिचित फाइटिंग स्टाइल भी थी... जैसे ...


उसके द्वारा खुद की लड़ाई अकेले लड़ना!


अजगर दांव!


फ्लाइंग किक!

स्नेक हैंड!


कराटे चॉप!


निहत्थों पर शस्त्र ना उठाना!


मुक़ाबला बराबरी का करना!


 स्टाइल में ओवरकोट से बाहर आना!


कई तरह की कराटे, कुंग फू स्टाइल का यूज़ करना!


ये वो नागराज था जो सिर्फ नागशक्तियों के भरोसे नहीं था बल्कि नागशक्तियों के बिना भी काफी घातक था। दुनियां का सर्वश्रेष्ठ कुंग फू फाइटर माना जाने वाला नागराज वाकई लाजवाब था।





Thursday, March 24, 2022

डायमंड कॉमिक्स का वो खूबसूरत दशक ।।

 


आशुतोष शर्मा जी की कलम से

1989 की बात है, जब मै पांचवीं कक्षा में था, उस समय बड़े भाई एक comic लाए थे फ़ौलादी सिंह और पागल रोबोट l फ़ौलादी सिंह और नागराज के हम दोनों भाई जबरा फैन होते थे l कॉमिक बहुत जोरदार थी जैसी आशा होती थी l परंतु उसका अगला भाग सितारों का दुश्मन आना बाकी था l बहुत इन्तेज़ार करवाया उस भाग ने l बस कैसे भी पूरी कहानी पढ़नी होती थी l उसके बाद आने वाली diamond comics का निराशा जनक दौर शुरू हो गया l कहानी से वो quality एकदम से गायब ही हो गयी l 

Diamond comics में जहां प्राण साब के चरित्र बच्चों में अत्यधिक लोकप्रिय रहे वहीँ दूसरी ओर किशोरों को Ashwini ashu की लेखनी से सुसज्जित फ़ौलादी सिंह, महाबली शाका,  लंबू मोटु जैसे चरित्र लुभा रहे थे l 

यद्यपि अश्विनी आशु जी का नाम बहुत दिनों तक आगे भी डायमंड कॉमिक्स में छपता रहा परंतु कथानक की गुणवत्ता बहुत नीचे पहुंच चुकी थी l एक ब्लॉग से ये भी पता लगा कि आशु जी स्वर्गवासी हो चुके थे, फिर भी उनका नाम लम्बे समय तक चलाया गया l 

डायमंड कॉमिक्स के उत्थान में जितना योगदान प्राण साब का रहा, आशु जी का योगदान उनसे बिल्कुल भी कम नहीं था l 

 यही कारण था कि हर उम्र वर्ग में डायमंड कॉमिक्स 80 के दशक में अपने समानांतर प्रकाशनों में सबसे लोकप्रिय थी l 

आशु जी के कथानक तार्किक, रोमांचकारी और किसी graphic नॉवेल से कम नहीं होते थे l या यूं कहिये कि ग्राफिक नॉवेल को प्रसिद्ध बनाने में आशु जी की लेखनी का बहुत बड़ा योगदान है l 


यद्यपि उस समय cheenu chtrikatha जैसे छोटे publishers ने famous novels को ग्राफिक नॉवेल सीरीज में उतारा जिसे परशुराम शर्मा सर और जगदीश पंकज सर ने  अपने विशिष्ट ढंग से कॉमिक्स फॉर्म में उतारा l (सुलेमान का खजाना 4 भाग सीरीज,  भटकती आत्मा 4 भाग  सीरीज) परंतु डायमंड कॉमिक्स के एकाधिकार के चलते अधिक प्रसिद्ध ना हो सके l 

उसकी अति लोकप्रियता ने उस समय मनोज कॉमिक्स को दूसरे स्थान पर रखा l डायमंड कॉमिक्स के नीचे आते आते राज कॉमिक्स के नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव का लगभग एकछत्र राज हो गया l 

बहुत से अच्छे लेखक विमल चटर्जी, परशुराम शर्मा, अंसार अख्तर, हनीफ सर जैसे और भी लेखक कॉमिक्स जगत में आए l परंतु आशु जी जैसी कहानियों की छाप कभी कोई स्मृति पटल पर छोड़ नहीं पाए l 

अब समय बदल गया हैl कॉमिक्स जगत का नया युग शुरू हो चुका है, नए प्रकाशनों का आगमन हुआ है l आशा है कि भविष्य में भी वैसी ही मौलिक उत्कृष्ट कथानक पुनः एक बार सभी पाठकों के हृदय पर शासन करे l



















Thursday, February 10, 2022

नागराज और बुगाकू

 

Devraj Sharma जी की कलम से

दोस्तो जब 1992 में नगीना का जाल विशेषांक के पीछे एक विज्ञापन आया था "फिर एक बार नागराज और ध्रुव एक साथ" 

सच कह रहा हु ऐड देख कर ही मैं पागल हो गया था 

ऐड में लिखा था कि इस विशेषांक के साथ ध्रुव का मैगनेट स्टीकर मुफ्त !!!

यार मैं  कंफ्यूज था कॉमिक्स नागराज की और स्टीकर ध्रुव का ? खैर इगनोर किया 

फिर इसके नए ऐड आये वो वही 32 पेज कॉमिक्स के 16 नंबर पन्ने पर जो बीच का पन्ना होता था, अगर उसको खींच कर निकाल लो तो वो एक छोटे पोस्टर से कम नही था, लेकिन उसके पीछे कॉमिक्स स्टोरी होती थी तो चाहकर भी नही निकाल सकते थे.....खैर मैं अपनी कहानी से भटक गया था, अब इन्ही छोटे पोस्टर्स में जगोता, फुकारू, और कांगो को देखा तो एक पल बुगाकु को भूल गया....फिर ध्यान आया कि यहाँ मिस किलर भी है जो अपने पहले विशेषांक का बदला नागराज और ध्रुव से लेने को लालयतित है और दूसरा सम्राट थोडांगा जो अपने ही घर अफ्रीका के जंगलों में नागराज के हाथों खाई शिकस्त और अपने टूटे हुए कवच से क्षुब्ध नागराज को किसी भी कीमत पर खत्म करना चाहता है, और इसके लिए उसने एक सपेरे के द्वारा नाग सम्राट वासुकी का खड़ग नागराज को मारने के लिए हथिया लिया था और मिल गया मिस किलर से और मिस किलर ने बनाया बुगाकु और उसको थमा दिया वासुकी का खड़ग, नागराज का सिर लाने के लिए 

उधर मिस किलर ने ध्रुव के सभी पुराने दुश्मनों की डमी बनाकर उसको खूब परेशान किया 

इधर पंगा दादा के माध्यम से बुगाकु नागराज को बेहोश करके और फिर ध्रुव को भी अपने साथ ले जाकर दोनों को एक साथ कैद कर दिया 

फिर थोडांगा और मिस किलर ने नागराज को बांध कर काँटाली - मानताली को छोड़ दिया जगोता फुकारू और कांगो का मुकाबला करने के लिए 

जब ये तीनो महा मुकाबले के बाद पस्त हो जाते है तब नागराज अपने नागों से आह्वान करता है खुद को खोलने के लिए...फिर जब खुल जाता है तो ध्रुव के साथ मिलकर तीनो शैतानों को अपने अंजाम तक  पहुचाता है 

फिर असली मुकाबला होता है बुगाकु से जो लगभग नागराज को मार ही देता है. लेकिन पाताल लोक के सर्पो की मदद से बुगाकु मारा जाता है और मिस किलर थोडांगा के साथ ट्रांसमिट हो जाती है 

वासुकी को उसका खड़ग नागराज उसको देता है और बदले में वासुकी नागराज को सम्मान में एक प्रतीक चिन्ह देता है...और वही चिन्ह नागराज की आगामी कॉमिक्स में हम सबने देखा ही होगा 

बस यार अब जितना लिखूं उतना बहुत समझना यारो 


आपका दोस्त देवराज शर्मा








Tuesday, January 11, 2022

नागराज और बुगाकू बनाम नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव


Devraj Sharma जी की कलम से 

नागराज और बुगाकू बनाम नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव

मेरा वोट तो दोनों को बराबर ही जाता है पर 1% अधिक नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव को ज्यादा जाता है जिसका एक बड़ा मासूम सा कारण है

उन दिनों जब प्रचारित किया गया कि राज कॉमिक्स अपनी पहली विशेषांक निकाल रहा है तो हम विशेषांक का अर्थ भी नही जानते थे बस, बातों, मित्र पंचायतों और सबकी जिरह से अपने आप अर्थ निकाल लिया था कि शायद विशेषांक का अर्थ होता होगा डबल कॉमिक्स यानी 32 की जगह 64 पेज.....हम खुश हुए कि हमने सही टप्पा मारा था

फिर घर के बड़ो से पूछा कि विशेषांक का क्या अर्थ होता है बताया गया स्पेशल एडिशन वो पल्ले पड़ गया क्योंकि हम KV के छात्र जो थे😂 

अब स्पेशल एडिशन ने हमारे दिल मे एक स्पेशल जगह बना ली कि कब आएगी ये स्पेशल कॉमिक्स हम रोज दिन और पैसे गिनने लगे, 

और दिमाग के दो हिस्से हो गए एक जो डेली रूटीन में लगता था और दूसरे दिमाग में नागराज, ध्रुव,मैगनेट स्टीकर, 64 पेज, मिस किलर, स्टोरी, और सबसे विशेष इसका चित्रांकन इत्यादि कैसा होगा यही सब घूमता रहता था 


आखिर 1991 का वो दिन आ ही गया जब अचानक ये कॉमिक्स स्कूल के सामने वाले बुक स्टाल पर बाकायदा स्टैंड पर डिस्प्ले दिखी, कवर देख कर तो रोम रोम खड़ा हो गया और दूसरा दिमाग बोला क्या कवर बनाया है यार....नागराज एक कांटो वाले लोहे के आदमी को मुक्का मार रहा है और उसके मुक्के से खून निकल रहा है, मन किया कि बस अभी इस स्पेशल एडिशन को अपना बना लू 

पर हाय मेरा दुर्भाग्य जमा किये पैसे घर पर थे 

मैं दौड़ दुकान पर गया अपनी बस का किराया 2 रुपया अंकल को दिया और कहा कि अंकल ये मेरे लिए बुक कर लो वो मुझे देख कर मुस्कुराए और बोले ठीक है बेटा

फिर मैंने अपना सर खुजाया और पहले वाले दिमाग से सोचा यार ये तो घर जाकर अपने सेक्टर से ही खरीद लेता ?

ये कल सुबह मिलेगी और घर जाकर आज ही खरीद कर पढ़ सकता था....बे मतलब बस का किराया अंकल को दे दिया इतने में असेंबली बेल बज गयी तो स्कूल में घुसना पड़ा 

पूरा दिन मेरा दीदा पढ़ाई में नही लगा वो कवर और मैगनेट स्टीकर ने मेरे दूसरे दिमाग के साथ मिलकर पहले वाले दिमाग पर भी कब्जा कर लिया 

खैर.... जैसे तैसे छुट्टी हुई किराया मैंने अपनी मैडम से ये कह के मांग लिया कि मेरे पैसे कही गिर गए और घर आ गया

आकर जल्दी से खाना खाया और भाग कर अपने परम मित्र के पास गया संयोग से उसका भी नाम नितिन था , उस से उसकी लाल हीरो साईकल मांगी बेचारे ने अपने भाई और मम्मी से छुप कर मुझे चाबी दी 

और मैंने साईकल सेक्टर 35 से जो दौड़ानी शुरू करी तो सेक्टर 31 पर रुकी,

फटा फट स्टाल वाले अंकल को 13 रुपये देकर वो स्पेशल एडिशन अपने नाम कर लिया 

मन तो कर रहा था कि एक एक पेज यही खड़ा खड़ा पढ़ डालू

लेकिन दोस्ती याद आ गयी, उसकी साईकल जल्दी लौटानी थी 


सो दुत्र गति से बापस आया, दोस्त को दिखाई वो बोला भाई सबसे पहले मुझे दियो पढ़ने को 


घर आकर सबसे पहले तो मैगनेट स्टीकर को चिपकाया फ्रिज पर और फिर अपने कमरे में बिस्तर पर दो तकिए लगा कर आराम से लेट कर दरबाजा लगा कर कॉमिक्स पढ़नी शुरू करी 

क्या बताऊँ एक एक पेज जैसे रोमांच का गुलदस्ता....

और सबसे बड़ा रोमांच सूमो फाइटर से लड़ाई के समय जब नागराज को ध्रुव कहता है "नागराज तुम और सूमो फाइट ?" तब नागराज का उत्तर "नागराज को चैलेन्ज की लड़ाई में ही मजा आता है दोस्त"

और दूसरा "नागराज अपनी लड़ाई खुद ही लड़ता है"


तो दोस्तो ये था वो 1% अधिक का कारण जिसकी वजह से नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव मेरे लिए थोड़ी सी अधिक स्थान रखती है ।।

Saturday, January 8, 2022

क्लासिक नागराज का अनंत अंतहीन सफर



 सफर अनंत था मेरा" मुश्किल थी सफर की हर डगर


 हर सफर में मिल रहे थे दुश्मन तो दोस्तों की भी कमी न थी, नहीं परवाह थी अंजाम की बुलन्द थे हौसले मेरे  हौसलों में कोई कमी न थी,नहीं सुकून था ज़िंदगी में

जब तक दुनियां में आतंकवाद के बादल छाए थे ,इन्हीं बादलों का वध करने हम इस धरा पर आए थे ।।

याद आता है सफर अपना , मैंने खुद से कहा था ना

है थकना ना ही रुकना ।।

चलता चला जा रहा था मैं पकड़े इस अनंत सफर की डोर नहीं नज़र आ रहा था इस सफर का कोई अंत न कोई छोर ।।


 नागराज और थोडांगा कॉमिक्स ये दृश्य भावुक कर गया था ।

कॉमिक्स खत्म होने पर भी काली के जाने का दुख  😓



नागराज का सफर

 Abin Sinha जी की कलम से


हाल ही में मैंने मेरे खास दोस्त नितिन सिंह जी के "नागराज और थोडांगा" से जांबाज हाथी काली के बलिदान और योगदान पर की पोस्ट पढ़ी जिसने मुझको भावुक और प्रेरित किया क्लासिक नागराज के उन पात्रों को याद करने का जो सफर में साथ रहे पर दुर्भाग्यवश उनका शरीर साथ छोड़ गया..

आइये मैं ऐसे दस पात्र को मेंशन करता हूँ आप लोगों को और याद आये तो जरूर बताना

(1)फ्लोरिडा ( नागराज का इंसाफ)

(2)मास्टर सुजुकी (नागराज की हांगकांग यात्रा)

(3) काली(नागराज और काबुकी का खजाना)

(4)ओसका (नागराज और थोडांगा)

(5) विषप्रिय( नागराज और शंकर शंहशाह)

(6)वान(नागराज और तूफान-जू

(7) टर्बो (नागराज और बेम बेम बिगेलो)

(8) डिसूजा(नागराज और मिस्टर 420)

(9)रोमो (नागराज की कब्र)

(10)ब्रूनो द किड( नागराज और अजगर का तूफान)



बॉलीवुड फिल्मों से कॉमिक्स कनेक्शन

Devraj Sharma  जी की कलम से✍️
एक ऐसा दौर जो मुझे आज भी याद आता है
एक ऐसा दौर जब से बॉलीवुड फिल्मों से जुड़ी है कॉमिक्स की यादें
"नगीना का जाल" के साथ  अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित की फ़िल्म ज़िंदगी एक जुआ रिलीज हुई थी ।।

क्योंकि मुझे अच्छे से याद है 18 मई मेरा जन्मदिन था तो मेरे भैया और बहन मुझे यही मूवी दिखाने ले गए थे और जब देख कर बापस आये तो मैंने गिफ्ट मांगा तो भाई को पता था कि इसको क्या चाहिए सो उसने मुझे 15 रुपये दिए और बोला मुझे पता है तेरे गिफ्ट के लिए ये काफी है 
मैं खुशी खुशी मार्किट गया और पहुच कर खुशी का ठिकाना न रहा ये देख कर कि नगीना का जाल आ गयी है और मैंने तुरंत प्रभाव से खरीद ली ।
फिर
बच्चो के दुश्मन के साथ
जैसी करनी वैसी भरनी

किशन कन्हैय्या और नागराज का दुश्मन 

शाकुरा के साथ हम भी रिलीस हुई थी शायद

तूफान जु और खिलाड़ी 

अभी तो यही याद आया है बाकी खूबसूरत यादें भी आपके साथ साझा करता रहूंगा ।।


Tuesday, October 5, 2021

क्लासिक नागराज का वो स्वर्णिम दौर-2


देवराज शर्मा जी की कलम से✍️
 1986 का समय था जब शायद मैं कक्षा 2 का छात्र था और गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गयी थी 

बड़े भाई बहनों की मदद से मैंने अच्छी हिंदी पढ़नी सीख ली थी तो जब ही चार आने या आठ आने मिलते तब कॉमिक्स की दुकान पर जाकर उधर ही बैठ कर किराए पर कॉमिक्स पड़ता था

उन दिनों नागराज के नाम से बिल्कुल अनभिज्ञ था, मुझे सिर्फ मनोज और राज की स्टोरी कॉमिक्स ही पढ़ना पसंद था 

गर्मियों की छुट्टियों के एक दिन बड़े भैया नागराज की कब्र लेकर आये अपने दोस्त से 

उसका कवर देख कर बहुत अच्छा लगा , मैंने भाई से पूछा भाई ये नागराज कौन है ? तो भाई का जबाब था ये पढ़ खुद समझ जाएगा 

38 पेज की वो कॉमिक्स पढ़ने के बाद रोमांच से भर गया मैं, 

मैंने सोचा कि क्या हीरो है जो हर तरह की फाइट जानता है, हाथों से सांप निकलते है, मुह से विषफुंकार, और किसी की आंखों मैं देख ले तो वो उसका गुलाम....

रोमो जैसे फाइटर से टक्कर और अंत मे एक सस्पेंस कि अब क्या होगा ????


उन दिनों छुट्टियों में राज वाले हर 10 दिन में एक नया सेट निकाल देते थे तो जल्द ही नागराज का बदला हाथ लगी 

फिर तो बस मैं और मेरा नागराज यही मेरी दुनिया थी

हांगकांग यात्रा और शांगो बढ़िया लगी, उसके तुरंत बाद आई खूनी खोज जो एक नए चित्रांकन और बहुत कसी हुई पटकथा के साथ थी, यहाँ हमने बिल्कुल नए तरह के नागराज को पढ़ा 

फिर तो खूनी यात्रा, नागराज का इंसाफ, खूनी जंग, प्रलयंकारी नागराज, खूनी कबीला, कोबरा घाटी जैसी महानतम कॉमिक्स पढ़ने का सौभाग्य मिला 

हर एक कॉमिक्स में जैसे परंपरा थी कि नागराज को एक मित्र तो मिलता ही था, इसके कुछ खास मित्रो के नाम है रोमो, तिकाशी, फ्लोरिडा, डॉन, टीना, सुगा, टोनी, सौडांगी, रुएबा खातून (मेरे बचपन का क्रश)☺️☺️☺️



Saturday, September 25, 2021

क्लासिक नागराज ही सही मायनों में असली नागराज था ।।

 

संदीप जुयाल जी की कलम से 

वाकई में क्लासिक नागराज का कोई तोड़ नही है उसके आगे सच बताऊँ तो आज का और महानगर का नागराज फीका ही लगता है फिर बात करे आर्टवर्क की या  कहानी की नए कैरेक्टर्स नए विलेन्स नई नई जगह एक्स्प्लोर करना वाकई में एक मजेदार अनुभव था। मैंने बचपन मे अनुपम जी का नागराज ही पढा था और मुझे पसंद भी आता था। लेकिन जब मैंने  क्लासिक नागराज पढ़ा करीबन 6,7 (ठीक से याद भी नही है अब)  पहले तो मैं अनुपम जी की कहानी को भूल गया क्योंकि क्लासिक नागराज में ठहराव नही था उसे पता लगता कि इस जगह आतंकवादी गतिविधिया हो रही है वो निकल पड़ता था बिना सोचे समझे की यहां से आतंकवाद को उखाड़ फेंकना है तब उसके आगे पीछे कोई नही था पर महानगर में जाने के बाद वो भारती कम्युनिकेशन में जॉब करने लगा उसकी लाइफ में भारती और विसर्पी की इम्पोर्टेंस ज्यादा बढ़ गई बजाय इसके की  बाकी दुनिया मे आखिर क्या हो रहा है क्या नही उसे फर्क नही पड़ता वो भी मोह माया के जंजाल में फंसकर हमारे जैसा ही बन गया और अपने असल कर्तव्य से  भटक गया या भटका दिया गया।  क्लासिक का अंदाज ही निराला था आज के नए रीडर्स को क्लासिक पसंद नही आता लेकिन जिसने भी उसे बारीकी से पढ़ा होगा उसे उसकी इम्पोर्टेन्स समझ मे आएगी मैंने खुद उसे इस जमाने मे ही पढा है और यकीन मानो मुझे वो नागराज सब नागराज पर भारी लगता है आर्ट और कहानी के मामले में, अपने प्रतिद्वन्दी को पहला मौका देना, प्रतिद्वन्दी को अपने मार्शल आर्ट से आश्चर्यचकित कर देना, अपने दिमाग और साहस से हर समस्या का समाधान करना अपने स्टाइल में यहां तक कि अपने दुश्मन को सेल्यूट तक करना  वाकई में जबरदस्त लगता था नागराज का अपना ही एक स्टाईल था नागों का पैराशूट बनाना और ओवरकोट में तो लगता ही जबर था वो बंदा लेकिन अब हालत यह है कि नागराज जैसे इतने बड़े हीरो को पढ़ने का मन तक नही करता है। हर राइटर अपने मन से ही लिखे जा रहा है नागराज को 3,4 नागराज बनाने से बढ़िया था 1 ही नागराज पर मेहनत कर लेते तो आज नागराज की स्तिथि कुछ और ही होती ।।