Wednesday, February 11, 2026
कोबरा घाटी (नागराज)
Jai Kishor Rankawat जी की कलम से......................................................................................................................’कोबरा घाटी’
नागराज की एक ऐसी सनसनीखेज कॉमिक थी जिसने मुझे रोमांच से भर दिया था। पांच ज्वालामुखियों के बीच बनी कोबरा घाटी... जहाँ महर्षि ज्वालानाथ समाधि में लीन थे। दुनिया से एकदम अलग... अपरिचित.... इतनी दुर्गम जगह पर किसी का साधना में लीन होना बहुत रोमांचक लगा था। खास के तब, जब उस जगह तक पहुंचने का मार्ग एक छोटे से बिल में से होकर था। नागराज का वहाँ तक पहुंचना... और कई तरह के सांपों की प्रजातियों से भिड़ना... उन्हें हराना... वाकई जबरदस्त लगा था।
इस कॉमिक का चित्रांकन इतना सरस और प्यारा था कि एकदम मन मोह लिया था। बचपन की पुरानी यादों में इस कॉमिक की एक खास जगह है।
गर्मियों की छुट्टियों में राज कॉमिक्स द्वारा दिए जाने वाले आकर्षक उपहार
Deepak Singh Jee की कलम से....................................................................................
राम राम जुनूनी बंधुओं,,
आज एक बार फिर मन चला गया था
उसी बचपन में,,
जहां भले ही और कुछ हो या ना हो,
पर अपनी कॉमिक्स जरूर रहती थी,,
दोस्तों से याद तो होगा ही आप सब को,
अक्सर गर्मी की छुट्टियों में
राज कॉमिक्स के द्वारा निकाले जाने वाले आकर्षक
प्रकार के उपहार योजनाओं की,,
जिनको देखते ही मन मचल के रह जाता था,
पर योजना का लाभ न उठा पाने की दशा में
इसी मन को मसोस के रह जाना पड़ता था,,
एक टीस तो रह ही जाती थी,,
अब याद आता है तो सोचने पर हंसी आती है,
की भले हीं rs-56 में एक पूरी सेट आ जाती थी,
फिर भी हम पूरी सेट न ले पाते थे,,
प्राथमिकता के आधार पर चयन कर के लेना पड़ता था,, कारण भी था,,
तब के समय में कॉमिक के नाम पर घर वालो द्वारा ना
कोई मासिक बजट मिलता था,,
और ना ही हम उसकी मांग सकते थे,,,बस,
समझ लीजिए कि ऐसा बलिदान सिर्फ हम जैसे कॉमिक प्रेमी ही दे सकते थे,,
हम ने अपनी जरूरत की चीजों में कटौती
कर कर के अपने कॉमिक प्रेम को पूरा किया है,,
पाई पाई जोड़ के अपने शौक को मरने नहीं दिया,है
अनेकों प्रकार के कर्म और कांड के द्वारा इस कॉमिक
प्रेम के प्रति हरदम न्याय ही किया है,,
एकदम अपने नितिन भाई जी की तरह,🤩
अब इससे बड़ा बलिदान क्या हो सकता है,,
वो भी उस छोटी सी उमर में,,
आते है मुद्दे पर ,,
आज सुबह में yr 2001 में प्रकाशित एक कॉमिक बुक के आखिरी पृष्ठ पर नजर गई है
उसी में एक आकर्षक योजना दिखी
मजा आ गया
क्या सॉलिड ऑफर था,,
rs 100 ki kharido aur rs-100 ki free le जाओ,,, देखते ही मन में एक विचार आया
की काश ऐसे ऑफर आज की तारीख में आ जाए,,
तो लूट मच जाएगी दोस्तो,,
समय की बात है,,
एक वो टाइम था,,,जब चाह कर भी ले नहीं पाते थे,,
और एक आज का दिन,,चाहे ,,तब भी ले नहीं सकते है,,
"(लगता है पोस्ट ज्यादा लंबा हो गया")
तो दोस्तों कोई है ऐसा वीर जो उस ज़माने में (2001)
इस आकर्षक योजना का लाभ लिया हो,,
या कभी किसी प्रकार का कोई उपहार पाया हो,
गुप्ता बंधुओं के द्वारा,,
मतलब क्या बात है,,यार ,
जितने मूल्य की लो उतने ही मूल्य का फ्री कॉमिक पाओ,
अगर आज के समय में इस प्रकार का कोई ऑफर आए
तो क्या आप नजर अंदाज कर पाओगे,,??
कुछ तो लोगे ना,,या कुछ छोड़ दोगे ,,
कि सब ले लोगे,,
सच्ची बताना,,मित्रों,,
वैसे एक बार पढ़ो इस योजना को,,
मन में एक काश, तो पक्का आ ही जाएगा,,
Tuesday, February 10, 2026
"थ्रिल हॉरर सस्पेंस" से कुछ याद आया दोस्तों
Deepak Singh Jee की कलम से✍️..............................................................................................
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...
राम राम मित्रों,,,
"थ्रिल हॉरर सस्पेंस", याद आया,,
या यूं कहा जाय कि शायद ही कोई कॉमिक प्रेमी हो जो इन को भुला भी हो,
ये 3 शब्द,
खोपड़ी बनी हुई तस्वीर का लोगो और
कहानी की शुरूआत में लिखा हुआ टैगलाइन, "कमजोर दिल वाले पाठक कृपया,
इसे रात में ना पढ़ें,"
राज कॉमिक के हर पाठक के जेहन में आज भी चस्पा होगा,,,m I right ?? fends
साथ ही इन कॉमिक के शीर्षकों द्वारा भी मानसिक रूप से एक डर का माहौल बनाया जाता था जिसमें वो सफल भी हो जाते कुछ ऐसे ही शीर्षक वाली कॉमिक बुक की तस्वीरें
हमने आख़िरी में पोस्ट भी की है,, क्योंकि,
बहुत ऐसे बंदे थे जो रात में पढ़ के अपने कमजोर या मजबूत दिल का परीक्षण करने का रिस्क लेना
नहीं चाहते, बल्कि
वो मान लेते थे कि सच में कुछ ऐसा ही घटित होता होगा,,अनेकों डरावने नामों के बीच
हमें सबसे पहले जो इसका डरावना शीर्षक लगा वो था इसका सबसे पहला विशेषांक
"एक कटोरा खून"
नाम में ही दहशत,छुपा था,
हालांकि एक बीच राज वालो ने इसका प्रकाशन बंद कर दिया था ,,पर कुछ ब्रेक के बाद दोबारा से इस सीरीज की तमाम बुक्स आई
जिनमें अधिकतर विशेषांक भी थी,,
और उनकी कहानियां भी ठीक ठाक ही ही थे
तो दोस्तों
थ्रिल हॉरर सस्पेंस जॉनर को ले कर आपके क्या अनुभव थे बचपन में ,,
वो कौन सा शीर्षक था जो आपको सच में
डरावना लगा और
कितना पसंद था आपको ये सीरीज पढ़ना ?
और क्या सच में इन को पढ़ते हुए कभी
डर का एहसास हुआ था आपको ?
plz,,
अपने अनुभव साझा कीजिए!!
अच्छा लगेगा ,,,
एक बार फिर बचपन को दोबारा याद कर के,,🥰
Monday, February 9, 2026
जादू मुलिक साहब का 💓🙏
प्रताप मुलिक जी भारतीय कॉमिक्स जगत के सबसे महान चित्रकारों में से है । मेरे कॉमिक्स से लगाव की एक बड़ी वजह उनका 'अकल्पनीय' चित्रांकन रहा है, बचपन में दुकानों में रस्सी से टंगी कॉमिक्स को देखता तो बस देखता ही रह जाता नज़रें नहीं हटती थे उनके द्वारा गढ़े चित्रों के मायाजाल से , आज भी कहानी कुछ वैसी ही है आज भी मेरी दुनियां उन्हीं के बनाये चित्रों के इर्दगिर्द घूमती है उनके बनाए चित्रों का अटूट सम्मोहन इस कदर छाया के आजतक उसके मोहपाश से बंधा हूँ
उन्हीं के बनाए दो चित्रों को जोड़कर एक चित्र को बनाया है जो आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ
दिल से आभार प्रताप मुलिक जी और राज कॉमिक्स का हमारे बचपन को इतना खूबसूरत बनाने को 💓🙏
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