Friday, April 21, 2023

छोटू-लम्बू और भिखारी का प्रेत

Rohit Sharma जी की कलम से----- छोटू-लंबू और भिखारी का प्रेत कॉमिक्स हमेशा से जब वो लिखी जाती है उस समय का एक सूचक होती है लेकिन कुछ कॉमिक्स इस सब से ऊपर हमेशा ही सामयिक होती है शेहाब जी की छोटू लंबू की लगभग सभी कॉमिक इसी श्रेणी में आती है और आज भी उतनी ही relevant है जितनी 80 के दशक में आप लोगों को मुन्ना भाई एमबीबीएस मूवी का वो सीन तो याद होगा जिसमे एक जापानी टूरिस्ट गरीब भूखे इंडियन देखने की डिमांड करता है ऐसा ही कुछ दर्शाता है शेहाब जी का भिखारी का प्रेत कॉमिक जब पहली बार बचपन में उस कॉमिक को पढ़ा तो मजा तो आया था लेकिन वो सोशल relevance समझ नही पाया था जो शेहाब जी की छोटू लंबू की इस कॉमिक के हर फ्रेम में थी अब कुछ समय पहले दुबारा पढ़ी तो एक एक फ्रेम को जोड़ कर देखा और पाया की विदेशियों को गरीबी की फोटो बेचने में लालच का एक बड़ा हाथ था और ये बखूबी दर्शाया है शेहाब जी ने ३२ पेज की इस कॉमिक में भिखारियों के लिए भीख मांगना एक धंधा है और एक organized धंधा है और जिसमे नेता और समाज के नामी गिरामी सेठ शामिल है और कैसे छोटू लंबू उन भिखारियों का भांडा फोड़ करते है ये उस बेहतरीन कॉमिक की कहानी का सारांश है लेकिन जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वो है शेहाब जी की मुफलिसी में भी छोटी छोटी बातों में खुशी ढूढने वाली कहानी शेहाब जी एक ऐसे कहानीकार और चित्रकार थे जिनको वो प्रसिद्धि कभी हासिल न हो पाई जिसके वो हकदार थे लेकिन उनके बनाए छोटू लंबू मेरे हिसाब से हिंदी कॉमिक के सबसे बेहतरीन पात्रों में से एक थे इस कॉमिक की कवर फोटो Tanvirul Hasan Abbasi ji से मिली ओरिजनल पोस्ट किसी वजह से डिलीट हो गई इसलिए दोबारा पोस्ट करना पड़ रहा है आप सब के कॉमेंट भी गए इस पोस्ट में

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