Friday, April 14, 2023
बेस्ट सेलर कॉमिक्स
Devraj Sharma जी की कलम से---------------------------
दोस्तो फिर से हाजिर हु अपने नए ब्लॉग के साथ जिसका शीर्षक है "बेस्ट सेलर कॉमिक्स"
ये लेख उन कॉमिक्स के बारे में है जो मार्किट में बम्पर sale के लिए पहचानी गयी थी हमारे जमाने में
तो आइए शुरू से शुरू करे,
नागराज की कब्र : दोस्तो नागराज की पहली कॉमिक्स ने राज पब्लिकेशन के लिए नया आयाम स्थापित किया, जिसके चलते इसके अगले भाग नागराज की कब्र का सबने बेसब्री से इंतजार किया और जब ये मार्किट में आई इसको कॉमिक्स प्रेमियों का आपार स्नेह मिला और इसकी बम्पर sale हुई
उन दिनों मनोज और डायमंड पब्लिकेशन स्थापित थे लेकिन इस कॉमिक्स के आ जाने से एक बार तो इनकी भी जड़े हिल गयी थी
नागराज का इंसाफ : खूनी खोज से नागराज के चित्रांकन को प्रताप जी ने एक नया अपडेट दिया और खूनी यात्रा ने नागराज के चाहने वाले बहुत बढ़ गए और नागराज का इंसाफ की wait करने लग गए, और जब ये कॉमिक्स आयी तो रिकॉर्ड तोड़ बिकी थी
नागराज का दुश्मन : इस समय तक इसमे कोई संदेह नही रह गया कि जब कॉमिक्स में एक नागराज ही तहलका मचा देता था तो अगर दो आ गए तो क्या आलम होगा, इसी विचार से नागराज प्रशंसको ने नागराज का दुश्मन का तहे दिल से इंतज़ार किया, और जब ये आयी तो अपने साथ मुफ्त नागराज के पोस्टर की सौगात लेकर आई और ये एडिशन बहुत बिका
इच्छाधारी नागराज : नागराज का दुश्मन में दो नागराज हो और उसका सेकंड पार्ट दूसरे दुश्मन नागराज के साथ नागमणि की बापसी ताख़ी जैसे विलेन के साथ हो तो ये संभव ही नही था कि ये पार्ट कमजोर पड़ जाता, नागराज का दुश्मन से ज्यादा बिका था
नागराज और जादूगर शाकुरा : परग्रही शैतान बौना जादूगर जिसने स्पाइडरमैन, सुपरमैन, बैटमैन जैसे सुपर हीरो को बंधक बना लिया, और नागराज ने ऐसे शैतान जादूगर को मात दी, इस कॉमिक्स का जबरदस्त क्रेज था और एक समय में ये मार्किट में खत्म भी हो गयी थी
नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव : उपरोक्त कॉमिक्सओ में सबसे बेस्ट सेलर, आखिर राज का पहला विशेषांक जो था
नागराज और बुगाकु : नागराज और ध्रुव की जोड़ी वाला दूसरा विशेषांक जो उस समय तक का रेकॉर्ड् तोड़ बिक्री वाला विशेषांक था
नगीना का जाल : नागराज, पंच नाग शक्ति का नगीना, किंग कोबरा, नागमणि, और मबीकेना से प्रलयंकारी टक्कर का ऐसा विशेषांक जिसमें नगीना के जाल में पाठक ऐसे फंसे की इसकी रिकॉर्ड तोड़ बिक्री करा दी
चैंपियन किलर और आखरी दाव : ध्रुव की ये दोनों कॉमिक्स बहुत sale हुई थी
आवाज़ की तबाही : धवनिराज, कर्कश यूकिलिप्टस से ध्रुव की शानदार जंग की बेस्ट सेलर
खूनी खिलोने : बौना बामन हमेशा एक ट्रिक बचा कर रखता है, इस कॉमिक्स ने भी विलक्षण कमाई की थी
किरिगी का कहर : जादूगर चंडकाल से ध्रुव, किरिगी, धनंजय, और जिंगलु की शानदार जंग एक अच्छी बिक्री वाली कॉमिक्स थी
चुम्बा का चक्रव्यूह : शायद जितने अलग अलग विज्ञापन इस कॉमिक्स के आये थे आज तक भी किसी के नही आये होंगे, जिसका परिणाम बेस्ट सैलिंग
हाहाकार : परमाणु का और चित्रकार मनु जी पहला विशेषांक जिसने बुक सेलेरो को बहुत कमा कर दिया
एक कटोरा खून : थ्रिल हॉरर सस्पेंस सीरीज का पहला विशेषांक जो बहुत बिका था
कर्फ्यू : ये कॉमिक्स अपने आप में एक खास रिकॉर्ड लेकर बैठी है, इस कॉमिक्स का पाठकों को इतना इंतज़ार था कि मार्किट में आने के सही 1 घंटे में पूरे मार्किट से ये कॉमिक्स गायब हो चुकी थी, जिस दिन ये आयी थी उस दिन मेरा 7th क्लास का फाइनल लास्ट पेपर था और में 6 रुपये अपने साथ ले गया था ये सोचकर कि 11 बजे पेपर खत्म होते ही कर्फ्यू खरीद कर ले जाऊंगा और घर पे पढूंगा लेकिन दुकान पर पता चला कि इनके पास जितने पीस आये थे सभी बिक गए, मैने कम से कम 10 दुकानों की धूल छानी परंतु सब जगह एक ही जबाब, फिर लास्ट मे याद आया कि जो कॉमिक्स कही नही होती वो बस स्टैंड पर जरूर होती है, फिर क्या चंडीगढ़ के बस स्टैंड की और साईकल घुमा दी और अंततः मिल ही गयी,
घर आया लंच की जगह डांट मिली कि 11 बजे पेपर खत्म हो गया और तू 2 बजे घर में घुस रहा है ?
इसी तरह ये है डोगा, और मैं हु डोगा बहुत बिकी थी
राजनगर की तबाही : राज कॉमिक्स का ये विशेषांक भी बहुत बड़ा बेस्ट सेलर था
तो दोस्तो ये था मेरा आज का ब्लॉग, अगर कोई कॉमिक्स मुझ से रह गयी हो तो आप भी अपने विचार व्यक्त कीजिये स्वागत है
धन्यवाद
आपका
देवराज शर्मा
Wednesday, April 12, 2023
नागराज और बुगाकू की रोमांचक मुठभेड़
Rajesh Jaiswal जी की कलम से-----------------
नागराज और बुगाकु-----बहुत ही रोमांचक लगी यह कॉमिक्स।सभी विलेन्स पारी दर पारी आते गए सामने तब तब दृष्टि उन्ही पर जम जाती।मिस किलर का प्रयोग प्रयोगशाला के साथ ये विलेन्स को फिर उतपन्न करना(क्लोनिंग जैसा कुछ सफल प्रयोग मिस किलर द्वारा).....और क्लोनिंग से पहले कुछ रहस्यमयी प्रयोग करा गया मिस किलर द्वारा किसी बहुत भयंकर भीषण महाक्रूर घाती योद्धा जो अपराजेय हो नागराज के सामने।मिस किलर का ज्ञान भी विस्मयकारी है खड्ग के वासुकी को ही फंसा लिया और सफल भी हो गई तांत्रिक/मदारी का प्रयोग करके--------मानव की फितरत बहुत घात करती हैं तांत्रिक के रूप में।
कहानी में सस्पेंस थी विसर्पी जिसे किसी षड्यंत्र के तहत समुद्री भयंकर जीव ने जकड़ रखा था---और थ्रिल के साथ नागराज का सबको बचाना(स्मरण रहे विसर्पी को भी बचाया!)...
सुपर कमांडो ध्रुव का आगमन भी रोमांचक था।हालांकि ध्रुव की जगह कोई और सुपरहीरो होता तो मज़ा कुछ और होता......खैर ध्रुव है तो ध्रुव की बात करते है------स्वर्ग की तबाही से लेकर महामानव तक-----फिर वुडू आदि से टकराव फिर सब विलेन्स का गायब हो जाना------हर टकराव में सभी विलेन्स गायब ही हो जाते है-----मिस किलर की भाषा मे ट्रांसमिट हो जाना।
रहस्यमय प्रयोग से पनपा एक योद्धा जिसे बुगाकु करके पुकारा गया।ये बुगाकु कुछ जापानी योद्धा जैसा था।.....और उसके हाथ मे थी वासुकी की खड्ग जो अलौकिक शक्ति से तैयार थी।
विसर्पी से पंगा दादा का जो आमना सामना हुआ वो भी रोचक था।पंगा दादा का साथ देना।फिर नागराज का पंगा दादा को मौत के घाट उतारना और बुगाकु के साथ प्रथम बार लड़ना----ये मुठभेड़ आश्चर्य में डालने वाली थी।बुगाकु के द्वारा नागराज का अपहरण।काँटाली मंटाली और फिर अनेक प्रकार के योद्धा।नागराज और ध्रुव का इन सबसे भिड़ना।नागराज द्वारा ध्रुव की जान बचाना।अंत मे बहुत ही आश्चर्य जनक से बुगाकु का खत्म करना बहुत ही रोचक था।बुगाकु को उसके काल से मिलाना नागराज द्वारा अद्दभुत था।भूमि से दो सांपों का प्रकट होना और बुगाकु को जकड़ कर उसकी शक्ति को क्षीण कर देना ये भी अकल्पनीय था कि ऐसा भी होगा ------बुगाकु का सटीक अंत।कुल मिलाके ये कॉमिक्स बहुत ही रोमांचक थी।प्रारंभ से लेकर अंत तक पाठक बस दृष्टि लगाए था कि आगे क्या होगा-----कॉमिक्स पढ़ते समय उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी।आर्टवर्क भी कहानी के अनुरूप बहुत बढ़िया थी।ध्रुव का एक्शन भी प्रशंसनीय था।एक बार पढ़ी है फिर से पढ़ने का मन कर रहा है बुगाकु।
आर्टवर्क के लिये 9/10 रेटिंग है मेरी।कथानक के लिये 9/10 रेटिंग है मेरी।कुल मिला के नागराज और बुगाकु सुपरहिट कॉमिक्स है।
Sunday, April 9, 2023
ये कॉमिक्स मैंने जब खरीदी तब मैं नहीं जानता था ये रिकॉर्ड तोड़ बिक्री करेगी😯
Jai Kishor Rankawat जी की कलम से ✍️------------------
नागराज और बुगाकू
ये वो दौर था जब कॉमिक्स का नाम सुनते ही आंखों में एक चमक आ जाती थी। ये वो दौर था जब स्कूल में कॉमिक्स छुपा के लाना ले जाना किसी तस्करी से कम न था। उन दिनों राज कॉमिक्स का जुनून सवार था हम पर। मनोज और तुलसी भी बड़े चाव से पढ़ते थे लेकिन पहली चॉइस राज कॉमिक्स ही रहती थी। राज कॉमिक्स के सितारे हमारे दिलों पर राज करते थे। उनमें सबसे चमकता सितारा था.... *नागराज*! उन दिनों नागराज का नाम सुनते ही अपराधियों से ज्यादा हमारे ज़ेहन में खलबली मच जाती थी। रोमांच अपनी हदें तोड़ देता था। कई कॉमिक्स पढ़ चुके थे अब तक। एक दिन किसी कॉमिक्स के अंदर के कवर पर एक जानदार एड देखा... 'नागराज और ध्रुव फिर से एक साथ' 'पढ़िए नागराज और बुगाकु'! बस फिर क्या था!!! एक एक नस में झुरझुरी दौड़ गयी। दिल कर रहा था कि जल्दी से जल्दी नागराज और बुगाकु पढ़नी है। बेचैनी भरा इंतेज़ार शुरू हुआ। हम बच्चों के बीच अब बस चर्चा का यही विषय बन गया था कि कब आएगी 'नागराज और बुगाकु!' कस्बे में एक इकलौती दुकान ही थी कॉमिक्स की... और हम सर खा चुके थे उस दुकानदार का। हालात ये बने कि हमे देखते ही वो बोल उठता अभी नहीं आयी भाई... आते ही बोल दूंगा। आखिर वो दिन भी आ गया... बेसब्री भरा इंतेज़ार खत्म हो गया।पिताजी से ज़िद की गई। ये किराए पे नहीं... पूरी दिला दो ना। आखिरकार नागराज और बुगाकु मेरे हाथों में थी। खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। एक दम नए कवर और बिल्कुल किताबी खुश्बू के साथ। प्रताप मुलिक जी के आर्टवर्क से सजा वो मनमोहक कवर आज भी अच्छे से रचा बसा है दिमाग में। उस विशेषांक को खोलने से पहले काफी देर तक गौर से निहारा था उस कवर को। फिर कांपते हाथों से खोली वो लाजवाब, रोमांचक चित्रकथा। बहुत ही धीरे धीरे पढ़ रहा था एक एक पन्ने को कि कहीं जल्दी खत्म न हो जाये। थोडांगा और मिसकिलर की जोड़ी छा गयी थी गज़ब का कॉम्बिनेशन जमा था। नागराज द्वारा जलदैत्य का खात्मा होने तक तो थोड़ी सामान्य सी लग रही थी। लेकिन मजा शुरू तब हुआ जब पंगा दादा और बुगाकु कि एंट्री हुई। नागराज द्वारा पंगा दादा का भयानक अंत देखने लायक था। बच्चों के उस दुश्मन का ऐसा ही अंत होना चाहिए था। क्लासिक नागराज का यही रूप सबसे ज्यादा प्रभावी था। कोई बंधन नहीं, कोई कसम की बंदिश नहीं ... फैसला ऑन द स्पॉट।
लेकिन गज़ब का लड़ाका और मार्शल आर्ट का सबसे बड़ा खिलाड़ी साबित हुआ बुगाकु। 'नागराज को मार्शल आर्ट में मात देने वाला निश्चय ही विश्व का सर्वश्रेष्ठ फाइटर है' ऐसा ही कुछ कहा गया था बुगाकु के बारे में। शक्ति खड्ग ने तो उसे अजेय ही बना दिया था। फिर दिखाया गया ध्रुव का शानदार सफर। बड़े ही रोचक अंदाज़ में ध्रुव की सारी कॉमिक्स की यादें ताज़ा करवा दी। मजा आ गया था। सबसे ज़बरदस्त सीन तो क्लाइमेक्स में था। नागराज को बंधा रख कर ध्रुव, और ओसाका काबिले के दो योद्धाओं की टक्कर दिखाई गई फुंकारु, जगोता और कांगो से। सबसे रोमांचक दृश्य था जब कांगो ध्रुव पर हावी होता दिख रहा था और नागराज का क्रोध भड़क रहा था। उत्तेजना के मारे मुंह से फुंकार निकलने लगी थी नागराज के मुंह से। मानो एक ज्वालामुखी को फटने से रोका जा रहा हो। आखिर ज्वालामुखी फट ही पड़ा। नागराज के भरोसेमंद सिपाही नागानंद और नागनाथ ने नागराज को आज़ाद करा ही दिया। स्वतंत्र होते ही नागराज ने जो जोहर दिखाया वाकई जोश से भर उठा था मैं भी। बेहद सनसनीखेज थी वो फाइट। यहां नागराज एक बड़े भाई की भूमिका में दिखाया गया था। मानो उसके रहते ध्रुव पर कोई आंच नहीं आ सकती। और ये देखना बहुत ही अच्छा भी लगा था। नागराज वास्तव में राज कॉमिक्स का लीडिंग सुपर हीरो है और उसे इस तरह ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। एकदम परफेक्ट सीन थे इस कॉमिक्स में। कहानी के अंत मे नागराज और बुगाकु की भयानक फाइट और नागराज का पलड़ा हल्का पड़ता देख घबराहट सी हो गयी थी। लेकिन नागराज तो नागराज ही था। एक बार फिर से नागराज ने अपने शत्रु को मौत के मुंह मे भेज दिया था। यहाँ एक और शानदार बात देखने को मिली जो दिल को छू गयी। थोडांगा, जो मेरा फेवरेट विलेन है, ने हार जाने के बावजूद भागने के बजाय नागराज से लड़ने की इच्छा जाहिर की। इस से इन विलेन्स का दमखम साबित होता है। ऐन वक़्त पर मिस किलर थोडांगा को लेकर फरार हो गयी। अब लास्ट पेज का जो सीन था वो सच में लेखक का कहानी के पात्रों और पाठकों से जुड़ाव को साबित करता है....सतरंगा से ध्रुव का परिचय कराते हुए नागराज को दिखाना ... ये एक ऐसा पॉइंट है जिसमें 'नागराज और थोडांगा' कॉमिक्स की कहानी से टच दिखाया गया था। इसके बाद की किसी कॉमिक्स में कभी ऐसा जुड़ाव देखने को नहीं मिला।
संजय गुप्ता जी की कलम से निकला ये शाहकार कॉमिक्स जगत का एक अनुपम ग्रंथ है।
जब ये कॉमिक्स मैंने खरीदी थी तब नहीं जानता था कि ये रिकॉर्ड तोड़ बिक्री करेगी। ये भी नहीं सोचा था कि ये दिन हमेशा के लिए बीते दिन बन जाएंगे और बस यादें शेष रह जाएंगी। जब कभी उस हसीन बचपन के दौर में लौटने का जी करता है तो कॉमिक्स के पन्ने पलट लेता हूं... और.... जी लेता हूं कुछ देर के लिए फिर से वो लम्हे... जो अनमोल थे।
-- जय किशोर रांकावत!
(राज कॉमिक्स प्रेमी)
Tuesday, April 4, 2023
बड़े बड़े अपराधियों का संहार नागराज अपने किशोर काल से ही कर रहा था
Devraj Sharma जी की कलम से---------------
क्लासिकल नागराज का सफर मैं थोड़ा सा संक्षेप मे सभी को बताता हूं जितना मैंने उसको 1986 से पढ़ा है
शुरुआत मे नागमणि, यूसुफ बिन अली खान,हुड आदि खलनायक जो नागराज की पहली कॉमिक्स में दिखे थे, वो सब आगे की कॉमिक्स मे आये और जमकर नागराज से मुकाबला हुआ उनका
नागराज ने अपना सफर बड़ी ही शालीनता से शुरू किया जहा उसने बुलडॉग, चांगो जैसे गैंगस्टर को अपने किशोर काल मे खत्म किया
फिर नागराज के लेखकों को शायद लगने लगा कि नागराज को जो प्रसिद्धि मिलनी चाइये वो शायद मिल नही पा रही, एक नियमित पाठक होने के नाते मैंने भी उस समय ऐसा ही सोचा था और शायद मेरे जैसे कई पाठको ने भी ऐसा सोचा होगा, और हमारी सोच को नया आयाम दिया गया खूनी खोज कॉमिक्स से, जिसमें न केवल नागराज को एक नया और आकर्षक रूप दिया पर उसका उद्देश्य का रूप नही बदला बल्कि उसकी कहानियों को भी एक अद्भत आयाम दिया गया
मुझे याद नही कि नागराज की कब्र के बाद से लेकर इच्छाधारी नागराज तक ऐसी कोई कॉमिक्स आयी हो जिसके 2 या 3 पार्ट नही रहे हो, क्योंकि नागराज की कॉमिक्स उस समय अपने उच्चतम शिखर पर आ गयी थी और पाठको को इसकी कॉमिक्स का इंतजार रहता था
इच्छाधारी नागराज के बाद कालदूत फिर जादूगर शाकुरा जैसा अमर खलनायक और उसके बाद तूतेन खामेंन, मिस किलर, सर् डॉन,और थोडांगा जैसे नए खलनायक और हुड व यूसुफ बिन अली खान जैसे पुराने खलनायको को नागराज ने धूल चटा दी
1991 मे नागराज की प्रसिद्धि अपने चरम पर थी इसको चरमोत्कर्ष पर पहुचाया इसके और राज कॉमिक्स के पहले विषेषांक "नागराज और सुपर कमांडो धुरुव" ने
उसके बाद नागराज को मिली एक नई खलनायिका नगीना और नागराज को मिली पंच नाग शक्ति जो अपने आप मे विशेष थी ।
काश हम प्रोफेसर नागमणि होते❤️
Joginder Sharma जी की कलम से----------------
आज एक पोस्ट देखी और पढ़ी
फिर अपन निकल लिए उस समयकाल में, जब कॉमिक्स पढ़ते नहीं थे बल्कि जीते थे, खासकर अपने #नागराज की
उन कॉमिक्स के हर एक पैनल का हिस्सा मानते थे खुद को।
क्या दिन थे, कई बार तो सोचते थे कि काश हम प्रोफेसर नागमणि ही होते तो #नागराज से इस दुनिया मे सबसे पहले मिलने वाले व्यक्ति होते हम
और मिलने वाले क्या, #नागराज को बनाने वाले होते और अपने #नागराज के साथ अपना नाम हमेशा हमेशा के लिए जुड़ा रहता
कोई #नागराज की जन्मगाथा को चाहे कितनी बार ही रिबूट, यही कहते हैं ना ये आजकल के जवान बच्चे, कर ले
अपने लिए तो #नागराज का ओरिजिनल ओरिजिन वही पुराने वाला ही है।
असली मजा भी उसी वक़्त आता था, कॉमिक पढ़ने का
क्योंकि उस वक़्त ये लॉजिक बाजी का ज्ञान पेलने वाले ज्ञानी, ये उन कलाकारों की आर्ट को तुच्छ मानने वाले प्राणी नहीं थे अपने आसपास,
तो जो भी कॉमिक पढ़ी जाती, दिल से ही पढ़ी जाती
कभी दिमाग लगाने की ना तो जरूरत पड़ी और ना ही हमने दिमाग लगाया क्योंकि एक बात तो हमे शुरू में ही समझ आ गयी थी कि जहां आपका दिल लगा हो, वहां आप दिमाग ना लगाएं तो ही बेहतर है,
फिर चाहे वो कॉमिक पढ़ने की बात हो या फिर कोई आपसी रिश्ता निभाने की बात
और कॉमिक तो अपनी पहली जानेमन थी, जिसके साथ हमने दिल लगाया था, दिमाग नहीं।
तो इसीलिए मैं ऐसे किसी ज्ञानचंद की पोस्ट पर कमेंट ही नहीं करता।
अब जो बकलोल मनोरंजन में भी लॉजिक ढूंढते हैं, वो कभी उसका असली मजा ले ही नहीं पाते क्योंकि मनोरंजन होता है दिल से, दिमाग से तो दुनियादारी ही होती है
और दुनियादारी में मजा नहीं होता क्योंकि
Life fucks all
😀😀😀😀🙏🏻
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