Sunday, January 17, 2021

क्लासिक नागराज का वो स्वर्णिम दौर ।।


        Jai Kishor Rankawat जी की कलम से

                         क्लासिक नागराज...

राज कॉमिक्स से जुड़ी कुछ यादों में सबसे खास है पुराने ऐड। जब कॉमिक्स के पिछले पेज पर इस तरह के ऐड देखता था तो रोमांच का एक सैलाब से फूट पड़ता था। उस वक़्त नागराज के गिने चुने कॉमिक ही मैंने पढ़ रखे थे। और जब भी नागराज के प्रकाशित कॉमिक्स की लिस्ट देखता था तो वो सनसनीखेज नाम पढ़कर बहुत कल्पनाएं करता था। जब नागराज के इस तरह के बैक कवर ऐड पर नज़र जाती तो मानो दिमाग झनझना उठता। बस कल्पनाओ की उड़ान। टाइटल कवर के चित्र देख कर ही कहानी का अनुमान लगाता रहता था। मुझे नागराज, ध्रुव, बांकेलाल के इस तरह के टाइटल कवर के चित्र वाले ऐड  बहुत ज्यादा पसंद थे।

नागराज के इन कॉमिक्स में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया कोबरा घाटी के कवर ने। इसके साथ ही खूनी कबीला, लाल मौत, नागराज और कालदूत जैसे धमाकेदार कॉमिक्स मन पर छाए रहते। अब नागराज के नए कॉमिक तो मेरे हाथ मे आ रहे थे लेकिन पुराने कॉमिक्स उपलब्ध नहीं थे। उनके प्रति मेरी तड़प भी बढ़ती जा रही थी। दरअसल मैं जिस शहर में रहता हूं वहां एक दो दुकाने ही थी जो मैं जानता था। वहां नए सेट तो कभी कभार मिल भी जाते लेकिन पूर्व प्रकाशित कॉमिक्स अब नहीं मिल रही थी। मैंने नागराज को 'काबुकी का खज़ाना' से पढ़ना शुरू किया था।इस से पहले वाले कॉमिक्स मुझे मिल नहीं रहे थे। धीरे धीरे ये कॉमिक मेरे हाथ में आने लगे। कोई खस्ता हालत में होते तो कोई बेहतर हाल में मिल जाते। इनकी खोज कुछ इस तरह से की मानो बगदाद की पुरानी गलियों में कोई रहस्यमयी चीज़ ढूंढी जा रही हो। एक एक कॉमिक् कीमती हीरे की तरह जमा की। मुझे आज भी ये कैप्शन रोमांचित करते हैं- "राज कॉमिक्स में पढ़िए नागराज के धमाकेदार कॉमिक्स/नागराज के सनसनीखेज कॉमिक्स/ नागराज के हैरतअंगेज कॉमिक्स।"

आज नए कॉमिक्स आते जा रहे हैं लेकिन उनमें वो बात कहां जो  इन अद्भुत 32 पन्नो में थी।

आज मेरे पास ये सारी कॉमिक्स है। सहेज के रखी है। इनमे बचपन जो है मेरा। 😊❤️











Saturday, January 16, 2021

तौसी और गिद्ध

 


               Vikas D जी की कलम से✍

     तौसी और गिद्ध कॉमिक्स से बहुत सी यादें जुड़ी है। 

एक समय ऐसा था जब तौसी और गिद्ध कॉमिक्स का बेसब्री से इंतज़ार था । गिद्ध की एक अलग ही खतरनाक छवि बन गयी थी कॉमिक्स आने से पहले दिलो-दिमाग में

जब मैं सिक्स क्लास में था तब इसे लास्ट टाइम देखा था..... हमारे यहां जहां अब हम रह रहे हैं पहले एक वियावान जंगल था और रेलवे पटरी के पास काफी बंजर भूमि भी थी... उस बंजर भूमि बीच में एक जोहड़ था जहां वाल्मीकि समाज के लोग की पूरी बस्ती है इस बस्ती के बीच में से हमारे स्कूल को जांने वाला एक शॉर्टकट रास्ता था अक्सर मैं और मेरा भाई पंकज इसी रास्ते से जाया करते थे  उस जोहड़ के आसपास हजारों हजार की तादाद में  गिद्ध पाए जाते थे और वह साइज में इतने बड़े हुआ करते थे जिन्हें देखकर डर जाया करता था मेरा भाई पंकज मुझे बोलता था कि गिद्ध आदमियों को लेकर उड़ जाते हैं तो मैं इनसे बहुत डरता था.....मेरा भाई पंकज तो ऐसा करता था जैसे हम उस जोहड़ के नजदीक पहुंचे था वैसे ही मुझे छोड़कर घर की ओर भाग जाता था मैं डरता डराता रोता हुआ घर आता था...... लेकिन एक लंगडी पटवारी ने अवैध तरीके से लोगों को बेच दिया है अब यहां पर पूरी कॉलोनी बस चुकी है गिद्ध नहीं पाए जाते..... अब यहां भेड़िए मिलते हैं इंसानी रूपी भेड़िए है मेरे पास एक फोटो है ढूंढ कर अपलोड करूंगा जिसे मेरे भाई ने खींचा था इसमें मैं और मेरा एक दोस्त खड़े हुए हैं और पीछे एक  विशालकाय गिद्ध बैठा हुआ है हमारे घर की छत पर......





Friday, January 15, 2021

मेरे बचपन का प्यारा साथी मेरा क्लासिक नागराज❤

 



         Jai Kishor Rankawat जी की कलम से

बात तब की है जब मैं मैंने राज कॉमिक पढ़ना शुरू किया ही था। अब तक मैं नागराज, ध्रुव, बांकेलाल और भोकाल जैसे केरेक्टर्स से जुड़ चुका था।तब तक मैंने नागराज की कॉमिक ' काबुकी का खजाना', 'नागराज और थोडांगा', 'खूनी खोज', 'खूनी यात्रा' पढ़ी थी।  फिर मेरे हाथों में आई नागराज की एक शानदार कॉमिक -  'नागराज का दुश्मन'! कॉमिक का टाइटल कवर देखकर सम्मोहित सा हो गया। ओवरकोट से निकलता नागराज बिल्कुल स्टाइलिश हीरो की तरह लग रहा था। जब कॉमिक के पन्ने पलटे तो नागराज का खलनायक रूप देखकर दिल बैठ गया। अंदर ही अंदर घुट गया। समझ ही नहीं सका कि मेरा सुपर हीरो इस तरह विलेन कैसे बन गया। बालमन घबरा गया कि नागराज किस तरह बदनाम होकर रह जायेगा। लेकिन जब एंट्री हुई रियल नागराज की।और जिस तरह से उसने नागदंत का पर्दा फाश किया सच मे सुकून मिल गया। कि हां... सब कुछ ठीक है। इसी तरह की कई फीलिंग्स जुड़ी है। हर कॉमिक के साथ। बैठे बैठे कभी जब बचपन मे लौटता हूँ तो ये सब याद करके होठों पर एक मुस्कान खेल जाती है। सच में क्या क्लासिक दिन थे वो! क्या क्लासिक नागराज था हमारा!!!








Friday, January 1, 2021

"लम्बू-मोटू और अजगरों की गुफा" एक बेहतरीन चित्रकथा





Ashutosh Sharma जी की कलम से -

 एक बहुत ही शानदार कथानक - लंबू मोटू और अजगरों की गुफा।

 हमारे सभी कॉमिक प्रेमी भाइयों को हर रविवार दोपहर को रेडियो पर आने वाले "मुन्नू पढ़ता डायमंड कॉमिक्स..." प्रोग्राम तो याद ही होगा।इसका तो बहुत बेसब्री से इंतज़ार रहता था। मज़ाल है कि कोई एपिसोड miss भी हो जाता।डायमंड कॉमिक्स पब्लिसिटी का ये अनूठा प्रयोग था।लगता था मानो कहानी को हम विभिन्न पात्रों के मुख से सुन नही रहे बल्कि देख रहे हैं। उसी में LM अजगरों की गुफा की कहानी सुनकर वाकई सिहरन सी दौड़ गई थी। मन में उस कॉमिक को पूरा पढ़ने की इच्छा बाकी थी। 

हवेली से आती रोशनी , विचित्र आवाजें।लोग वहां जाने से डरते थे। वही लंबू मोटू का स्कूल कैम्प लगता है और उनका एक साथी गायब हो जाता है। पर कोई सुराग हाथ नही आता। हवेली में एक खानदानी दंपति और उनका एक नौकर।आस पास भी कोई सबूत नही। 

फिर छुपकर तलाश करते हुए लंबू मोटू उस हवेली में घुस जाते हैं, वहाँ उन्हें एक बीन की आवाज़ सुनाई देती है।अंदर का दृश्य देखकर मानो आंखें कटोरों से उबलकर गिरने वाली ही होती हैं। बीन की आवाज़ पर उनका नौकर आधा इंसान और नीचे से आधा अजगर बनकर भयंकर फुफकार चीत्कार करते हुए बीन पर थिरक रहा है। आगे क्या होता है यही कहानी को विराम हो जाता है और भय तथा आश्चर्य मिश्रित कहानी को पूरा कौन नहीं पड़ना चाहेगा।

😉😉😉

मेरा ये कॉमिक पढ़ने का इंतज़ार बहुत लंबे समय बाद खत्म हो पाया। Er Shushant Mittal भाई की कृपा से मुझे वो शानदार कॉमिक्स प्राप्त हुई। और मेरी अधूरी जिज्ञासा शांत हुई। आप सभी भाइयों में से किसकिसने ये पढ़ी है।



भारतीय कॉमिक्स जगत का वो स्वर्णिम दौर

 







Rajesh Jasiwal जी की कलम से ✍

सहपाठियों,......💐 ये कालजयी कॉमिक्स कैसे बंद हुईं ?दुख हो रहा है 😢😢😢😢 कितने बड़े लेखकों, आर्टिस्टों को हमने गुमनामी की गर्त में जाने अनजाने में धकेल दिया।इसका जिम्मेदार मैं भी अपने आपको मानता हूँ।ये कॉमिक्स हमारे लोगो को हमसे जोड़ने का अतुल्नीय साधन था।उफ! ये पीड़ा सचमुच इतने वर्षों बाद उभरेगा वो भी हर चीज़ काफी एडवांस औऱ बेहतर होगी पर मन को सिर्फ आनंद देने का काम सिर्फ ये पुरानी कॉमिक्स ही कर पा रही हैं।इसका कारण एकमात्र हैं ऐसा मेरा मानना है कि ये कॉमिक्स हृदय से निकल कर मस्तिष्क पे छाप छोड़ती थी।कहानी,पटकथा ,कला इत्यादि सब एक ही समय की थी पर समय और भावनाओं से काफी आगे थी।जो भी आगे इसका उद्भव फिर से होगा कि नही कहा नही जा सकता पर ये सब हमारे यादों में अपना प्रेम उड़ेल चुकी हैं और समय समय ये फिर हमें स्वर्णिम पलो में ले जाएंगी।मनोज कॉमिक्स,तुलसी कॉमिक्स,अमरचित्रकथा,इंद्रजाल कॉमिक्स,स्टार कॉमिक्स,पवन कॉमिक्स,डायमंड कॉमिक्स,प्रभात कॉमिक्स,राधा कॉमिक्स,दुर्गा कॉमिक्स,राज कॉमिक्स इत्यादि।







Wednesday, October 7, 2020

नागराज एक विलक्षण योद्धा






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विकास दास जी की कलम से  

नागराज एक विलक्षण योद्धा.......


कॉमिक्स का नाम याद आती है कॉमिक्स प्रेमियों के बीच में कई कॉमिक्स हीरो के करैक्टर उभर कर आते हैं और हर किसी की अपनी अपनी पसंद है!

कॉमिक्स इतिहास बहुत विस्तृत नहीं है ,भारत में 70 के दशक से कॉमिक्स इतिहास की शुरुआत हुई और फिर शुरू हुआ कॉमिक्स में सुपर हीरो का दौर जो कुछ न्यूज़ पत्रिकाओं के बीच में ही प्रकाशित हुआ करता था या  उस समय प्रकाशित होने वाले  साप्ताहिक या मासिक पत्रिकाओं के बीच में भी यदा-कदा दिखाई दिया करते थे  जैसे #प्राण जी का चाचा चौधरी सबसे पहले लोटपोट पत्रिका में दिखाई दिया, उस दौर के पत्र-पत्रिकाओं में ज्यादातर विदेशी कॉमिक्स कैरक्टर्स के  छोटे-छोटे कॉलम वाली स्टोरी आती थी !

उसके बाद डायमंड कॉमिक्स में दाबू राजन इकबाल लंबू मोटू लंबू छोटू शुरुआत के तौर पर उभर कर आए लेकिन इनमें से इनमें से कोई भी करैक्टर ऐसा नहीं था जो उस दौर के मार्बल डीसी के सुपरमैन की टक्कर लेता हो उसके बाद डायमंड कॉमिक्स का सबसे पहला कॉमिक्स एडिशन जो प्रकाशित हुआ उसमें एक ऐसा हीरो आया जो वास्तव में सुपरमैन जैसी छवि रखता था मेरा पसंदीदा #फौलादी_सिंह


लेकिन इतने से भी बात नहीं बन रही थी कॉमिक्स प्रेमियों को उस दौर में अभी भी एक्शन पैक्ड हीरो की जरूरत महसूस हो रही थी शायद यह दौर वह दौर था जब राजेश खन्ना ,देवानंद जैसे हीरो अपनी ढलान पर थे क्योंकि आप 80 के दशक की फिल्में देखिए वह आपको भरपूर मारधाड़ से भरी पड़ी मिलेंगी उस दौर में मिथुन चक्रवर्ती अमिताभ बच्चन, गोविंदा ,अनिल कपूर, संजय दत्त जैसे हीरो और उनकी एक्शन फिल्में देखने को मिलेंगी

लेकिन कॉमिक्स के साथ ऐसा नहीं था उस दौर में कॉमिक्स इंडस्ट्री में जासूसी करैक्टर और जासूसी को साथ हास्य मिला जुला रहता था बहुत देखने को मिलते थे जैसे लंबू मोटू ,मोटू छोटू ,लंबू छोटू ,दाबू ,सागर सलीम अमर अकबर ,इंस्पेक्टर मनोज ,,मकड़ी रानी, इंस्पेक्टर गिरीश ,राम रहीम ,कर्नल करण और भी ना जाने कितने जासूसी पात्र आपको ढूंढने से मिल जाएंगे लेकिन फुल टाइम एक्शन हीरो का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था मनोज कॉमिक्स में काफी सारे करैक्टर थे लेकिन जैसा कि मनोज कॉमिक्स के अंतिम दौर में उनके पास खूब सारे एक्शन और सुपर नेचुरल पावर हीरो वाले थे लेकिन 80 के दौर में वह भी उनके पास नदारद थे !

हास्य और जासूसी के दौर में मनोज कॉमिक्स के पास महाबली शेरा और काला प्रेत जैसे कॉमिक्स करैक्टर तो थी लेकिन वह सुपर नेचुरल पावर लिए हुए नहीं थे इसीलिए मनोरंजन नाम पर उस समय सिर्फ एक्शन पैक्ड फिल्में थी और कॉमिक्स के नाम पर सिर्फ जासूसी पत्रिकाएं या जासूसी कॉमिक्स या हास्य कॉमिक्स ही उपलब्धि थी!

उस दौरान राज कॉमिक्स भी कॉमिक्स की दुनिया में पकड़ बना रहा था और उनके पास भी काफी अच्छी कहानियां और पात्र थे लेकिन उन पात्रों में #गगन और #विनाशदूत पाठकों के बीच में एंट्री ले चुके थे और पाठक गण वह पात्र पसंद भी आने लगे थे लेकिन वह रिक्त स्थान नहीं भर पा रहा था जो एक सुपर हीरो सुपरमैन को टक्कर दे सके


फिर आया साल 1986 और हमारा #क्लासिकल_नागराज


वैसे तो मैं 1982 की पैदाइश हूं और मैंने सबसे पहली बांकेलाल की कॉमिक्स 1989 मे पढ़ी थी (जिसे पढ़कर मैं इतना हंसा ऐसी हंसी फिर कभी मुझे आज तक कभी नहीं आई) 

मेरे बड़े भाई लोग सभी कॉमिक्स के शौकीन थे और उन लोगों के कारण ही मैं कॉमिक्स का दीवाना बना मेरे बड़े कॉमिक्स लेकर आया करते थे और मैं उस समय सिर्फ हास्य कॉमिक्स को ढूंढा करता था जो मुझे बड़ी आसानी से सुलभ हो जाया करती थी


लेकिन एक दिन मैंने पढ़ ली #नागराज 


शायद गर्मियों की छुट्टी की बात है उस समय हमारे घर के आसपास खूब खाली जगह हुआ करती थी और पूरा गांव अमरूद और आम बगीचों से भरा पूरा था और हमारा घर बिल्कुल एकांत में था मुझे आज भी याद है मेरे बड़े भाई पंकज का एक मित्र अनिल जो राजस्थान निवासी था और उनके पिताजी यहां आर्मी कैंट में जॉब किया करते थे ,वह घर पर आया लेकिन घर पर उस समय कोई नहीं था मैं और मेरी मां कि घर पर मौजूद थे अनिल को भी कॉमिक्स पढ़ने का खूब शौक था मेरे पास कुछ कॉमिक्स रखी देखकर उसने मुझे कहा कि यह कॉमिक्स मुझे चाहिए लेकिन मैंने भी उसके सामने यह शर्त रख दी कि इसके बदले में कोई कॉमिक्स लेकर आए वह तुरंत अपने घर दौड़ा-दौड़ा गया और नागराज और नागराज का बदला कॉमिक्स लेकर आ गया जिसके बदले में मैंने उसे बांकेलाल की दो या तीन कॉमिक्स पढ़ने के लिए दे दी लेकिन मेरे लिए ऐसी जटिल कॉमिक्स पढ़ना बहुत बड़ी बात थी लेकीन मैंने किसी तरह मन मार कर नागराज कॉमिक्स तो पढ़ ली लेकिन मेरे उस समय होश उड़ गए जब मैंने उसका दूसरा पार्ट नागराज की कब्र के बारे में पढ़ा लेकिन वह कॉमिक्स मेरे पास तो थी ही नहीं अब नागराज का बदला पढ़ कर क्या करना था (इस पर मेरे भाई पंकज और संजय ने मुझे घर आकर बहुत कूटा)

ही ही ही बू हू हू 😂😭 भाई लोग मुझे बोले इस कॉमिक्स का क्या फायदा कि इसका दूसरा पार्ट अब मिलेगा नहीं यह और यह कहानी हमारी बर्बाद हो गई.....

और मैं भी नागराज की उस कॉमिक्स के लिए लालायित था क्योंकि मेरी कहानी पूरी नहीं हुई थी और यह सोच सोच कर परेशान हो रहा था कि अब नागराज का क्या होगा या नागराज अब क्या करेगा??

शाम को अनिल फिर घर मैंने उसके सामने यह बात रखी कि तू ने मुझे कैसी कॉमिक्स दे दी नागराज का सेकंड पार्ट तो तूने दिया ही नहीं तो उसने मुझे बताया कि यह कॉमिक्स उसके घर में रखी हुई है ,अब मैं और मेरा भाई पंकज अनिल के सिर हो गऐ की नागराज की कब्र कॉमिक्स लेकर आ वह फिर घर गया और कॉमिक्स लेकर आया तब जाकर हमारी आत्मा तृप्त हुई 

फिर मेरे बड़े भाई संजय ने शाम के समय यह तीनों कॉमिक्स जो महान लेखक परशुराम शर्मा जी द्वारा रचित थी [[उस समय हम ना तो कॉमिक्स के लेखक हो के बारे में पढ़ते थे और ना आर्टिस्ट के बारे में और ना यह कॉमिक किसने संपादित की है उसके बारे में पढ़ते थे कॉमिक्स उठाते ही सीधा पढ़ना शुरू कर देते थे]] #नागराज_नागराज_की_कब्र_नागराज_का_बदला कॉमिक्स पढ़कर सुनाई फिर उसके बाद हम चारों भाई जो नागराज के जबरदस्त फैन हुए उसका कहना ही क्या 

कहानी जारी है........


क्रमशः


यह कहानी सिर्फ क्लासिकल नागराज के लिए लिखी गई है इसीलिए इस में कोई भी अपने आलतू फालतू नागराज की नाक ना घुसेडे..... और ना ही मेरे इस लेख को कहीं और तोड़ मरोड़ कर पेश करें यह लेख मैंने बड़ी मेहनत से 1 घंटे में लिखा है


#अपना_क्लासिकल_नागराज_VD


हैप्पी बर्थडे नागराज🎉🎊

https://www.facebook.com3/vikas.das.71465


Wednesday, September 30, 2020

कॉमिक्स से जुड़ा वो प्यारा बचपन




भारतीय कॉमिक्स जगत के सबसे बड़े सुपरहीरो "नागराज" का ये पोस्टर मेरे पिताजी के कमरे में लगा हुआ था ,मुझे याद है बहुत पुराना होने के बाद भी उन्होंने कभी इसे हटाया नही , दिल से जुड़ा है प्रताप सर का बेहतरीन आर्टवर्क , पुराने भारतीय केलंडरो  पे जिस तरह भारतीय  देवताओं  के मोहित करने वाले चेहरे होते थे  कुछ उसी तरह का आकर्षक रूप उन्होने नागराज को दिया, नागराज की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ उन्हीं का था । ये मैं ही जानता हूँ की
मेरे पिताजी क्लासिक नागराज के कितने बड़े दीवाने थे और उन्हीं की तरह मैं भी दीवाना हूँ क्लासिक नागराज, प्रताप मुलिक जी ,Sanjay Ashtaputre जी, चंदू जी के नायाब 
चित्रांकन का ।।
मुल्लीक सर का एक और शानदार आर्टवर्क जो इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ।।

Saturday, September 26, 2020

नागराज अपने अपराध उन्मूलन के सफर के दौरान इस बार आ पहुंचा है इटली ।।



 ख़ेल जब शतरंज हो ,और इंसा मोहरों में ढलें , ज़िंदगी के दाँव हों, हों मौत से कम फ़ाँसले,जब बुलाया हो गया मक़्तल में ,धोख़े से बशर जब करे कोशिश कोई कि बाँध दे तेरी नज़र जब दिखाया जाये कुछ,और कुछ हो-हो रहा जब हँसे कोई लिपट के तुझसे..और हो रो रहा जब तेरी परछाँयी बनकर अज़नबी चलने लगे कोई झप्पी,सिल्वियानो भेद में ढलने लगे तब हरेक सिक्के के पहलू देख दोनो ओर से जो सुनाया जा रहा हो सुनना उसको ग़ौर से है बहोत मुमक़िन..हो गहरी,दिख़ती हर बेज़ा सी बात पाँओं के नीचे बिछी हो कोई शतरंजी बिसात पूछ किस घटना का मतलब क्या है खुद से ये सवाल जानो-जिस्मों लक्ष्य के फ़िर 'तीन सिक्के' दे उछाल ।।


Monday, September 7, 2020

 मुझे ठीक से याद नहीं पर ये बात शायद 2012- 2013 की होगी मैं कॉमिक्स की तलाश में अपने दोस्त Nafis Ahmed के साथ पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिये निकला  , स्टेशन के हर बुक स्टाल पे देखा, पर मुझे मुलिक जी वाले नागराज का पुराना कलेक्शन नहीं मिला , बहुत दुख हुआ की जिस मकसद के लिये आया था वो पूरा नहीं हुआ , बहुत ढूंढा पर मुझे मेरे क्लासिक नागराज का कलेक्शन नहीं मिल रहा था। मैं थक हार कर रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों पर बैठ गया, मुझे उदास देखकर मेरे दोस्त नफीस अहमद ने "कहा " हमने जो स्टेशन से कॉमिक्स खरीदी है उनमें में एड्रेस देख नागराज नावल्टीज़ है कहाँ वहीँ चलते है, एड्रेस देखने के बाद पता चला हम नागराज नावल्टीज के पास ही है ।फिर क्या था  नागराज का कलेक्शन पूरा करने  मैं नागराज नावल्टीज (दरीबा कलां ) पहुँच गया ।   दरीबा कलां की भीड़ भरी गली में पहुँचते ही मैंने कॉमिक्स निकाल के वहाँ बैठे दो लोगो से पता पूछना चाहा ।

मेरे हाथों में कॉमिक्स देखते ही उन्होंने बिना पूछे मुझे ऊपर जाने का इशारा किया । सीढ़ियों से ऊपर जाते ही मैं अपनी कॉमिक्स की जन्नत में पहुँच चुका था ,नागराज नावल्टीज जिसके बारे में मैंने बचपन में सिर्फ सुना और कॉमिक्स में पढ़ा था मैं वहाँ आ गया था । जहाँ मुझे विश्वास था की मेरा नागराज कलेक्शन पूरा हो जायेगा , बस फिर क्या था मैंने मुलिक जी वाले नागराज की कॉमिक्स के नाम दनादन लेने शुरु कर दिये । और उन्होंने भी जल्दी ही मुझे मेरी लिस्ट की सारी कॉमिक्स निकाल के दे दी ,सिवाय नागराज और कालदूत और बच्चों के दुश्मन के ये दो कॉमिक्स उस वक़्त उनके पास उपलब्ध नहीं थी । फिर मैं कॉमिक्स की गिनती करने लगा ,और जो मैंने देखा वो देख कर मुझे कितना बुरा लगा और कितना गुस्सा आया मैं बता नहीं सकता खूनी खोज, खूनी यात्रा , और प्रलयंकारी मणि का कवर पेज चेंज कर दिया गया था , मैंने तुरंत उसे चेंज करके पुराने कवर वाली कॉमिक्स मांगी । दुकानदार के चहेरे पर अलग सी मुस्कान थी ,जैसे मुझ से पहले भी ये बदले हुए कवर की कॉमिक्स औरों ने वापस की हो ,पर दया थी महादेव की मुझे तीनों कॉमिक्स पुराने कवर पेज के साथ मिल गयी थी....😀 हर हर महादेव....😊😊😊😊😊