Thursday, September 15, 2022
1991 की गर्मियों की वो खूबसूरत सुबह ।।
राज नहीं मनोज कॉमिक्स थी पाठकों की पहली पसंद ।।
राज कॉमिक्स आने के बाद कदंब जी ने इसकी जनरल कॉमिक्स की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली जो बहुत पसंद की गई
सुपर कमांडो ध्रुव की क्लासिक कॉमिक्स के कवर पेज इसके गवाह है, इसके बाद कदम जी को जिम्मेदारी दी गयी भोकाल की कॉमिक्स की चित्रकारी की, और मेरी उम्र के सभी दोस्त जानते है कि ख़ौफ़नाक खेल, तिलिस्मी ओलंपाक, भोकाल, शूतान, अतिक्रूर, और भोकाल तिलस्म में और तिलिस्म टूट गया की महान चित्रकारी कोई भूल नही सकता और जहां तक उनसे संभव हुआ भोकाल के 90 % कॉमिक्स की चित्रकारी इन्ही की बदौलत है, भले ही भोकाल की बाद की कॉमिक्स की कहानी कचरा क्यों न हो गयी हो लेकिन इनकी चित्रकारी में कभी कोई कमी नही आई
आज शायद विजय कदंब जी हमारे बीच नही है लेकिन इनकी चित्रकारी से सजी सेकड़ो कॉमिक्स आज भी हमारे जेहन में अमर है और रहेंगी।।
Wednesday, September 14, 2022
नागराज के पराये होने की कहानी....
दोस्तों अपना पसंदीदा सुपर हीरो नागराज जो कभी एकदम अपना लगता था, धीरे धीरे पराया सा होने लगा। यहां क्लासिक नागराज के बारे में बात की जा रही है। ये परायापन अचानक नहीं आया। ये भी नहीं कह सकते कि लेखक बदलने से ही नागराज चेंज हो गया (ये कारण तो था ही लेकिन इसके अलावा भी कुछ कारण थे)! दरअसल नागराज की कहानियों में परिवर्तन लेखक बदलने से पहले ही आने लगे थे। मुझे ये बदलाव 'नागराज और मिस्टर 420' से महसूस होने लग गए थे। लेकिन आर्टवर्क की वजह से जुड़ाव बना रहा। फिर आये नागराज के तीन कॉमिक्स 'नागराज और तुतेनतू' , नागराज और पापराज' तथा 'नागराज और कांजा'! इन तीन कॉमिक्स में नागराज की कहानियों का दम खत्म सा प्रतीत होने लगा। ये कहानियां पहले जैसी दमदार और रोमांचक नहीं थी। 'विसर्पी की शादी' और 'नागराज और मिस किलर' कॉमिक भी दमदार नहीं कही जा सकती। इनमें वो नागराज का परंपरागत आभामंडल नहीं था जैसा काबुकी का खजाना, थोडांगा, ताजमहल की चोरी, खूनी कबीला, खूनी खोज जैसी कॉमिक्स में था। 'नागराज और कांजा' ने तो मानो दिल ही तोड़ दिया था। उसके बाद शुरू हुआ वो दौर जिसने नागराज को हमेशा के लिए बदल के रख दिया। हालांकि शुरुआत में ये बदलाव थोड़ा ठीक लगा। 'खज़ाना' सीरीज से थोड़ा नयापन लगा। लेकिन उसके बाद...... जो वाहियातपन शुरू हुआ ... सच में दिल जार जार करके रोया। क्राइम किंग, रक्षक नागराज,'बाम्बी', 'स्नेकपार्क' 'विष अमृत' 'सम्मोहन' 'इच्छाधारी' 'पागल नागराज' जैसी कॉमिक्स ने नागराज के प्रति मोहभंग कर दिया। उसके बाद शुरू हुई 'पुत्र उन्नयन योजना' अर्थात कप्तान जी को ऊंचा उठाने की कवायद। जिसने दिमाग की 12 बजा दी। हर एक कॉमिक्स दिल पर हथोड़े की तरह चोट करने लगी। हमारा प्यारा नागराज धीरे धीरे हमसे दूर होने लगा। और अंत में उसने हमें और हमने उसे खो दिया।
आज भी जब कभी कॉमिक्स के खजाने को खोलता हूँ तो बस क्लासिक नागराज से आगे की कॉमिक्स को हाथ भी नहीं लगा पाता। नागराज और अदृश्य हत्यारा से पहले की कॉमिक्स 100 से ज्यादा बार पढ़ चुका हूं लेकिन उसके बाद की कॉमिक्स एक बार भी मुश्किल से पढ़ पाया... कलेक्शन के लिए रखी हुई है बस। हो सकता है सबके ख्याल अलग अलग हों... लेकिन मेरा यही अनुभव रहा
Tuesday, September 13, 2022
वास्तविक नागराज

Jai kishor Rankawat जी की कलम से
दोस्तों, हमारा नागराज क्या था?? और क्या बना दिया गया ??? ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। इसे षड्यंत्र कह लीजिए या पक्षपात लेकिन नागराज इसका जबरदस्त शिकार बना। जो नागराज को शुरू से जानता है वो ही इस पीड़ा को समझ सकता है। बाकी न्यूकमर्स तो कप्तान जी की ही पूंछ पकड़े रहेंगे। अब आप ही बताइए... जिन लोगों ने अपने आरंभिक दौर में 'नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव' और 'नागराज और बुगाकु' पढ़ी हो वो 'नागाधीश, 'परकाले', 'सौडांगी', 'वर्तमान' जैसे कॉमिक्स कैसे पसंद कर सकेंगे??? ऐसा नहीं है कि ये सब नागराज के साथ ही हुआ हो... बेचारे डोगा को भी मल्टीस्टारर में चीखते हुए, कराहते हुए दिखाया गया है। जबकि ज़बरदस्त चोट पर भी न चीखना डोगा का एक बेसिक पावर है और एक चारित्रिक पहचान है लेकिन इसका भी ध्यान नहीं रखा गया। प्रतीत होता है लेखक को अपने प्रिय पुत्र ....(सॉरी) ...पात्र के अलावा किसी अन्य किसी हीरो की कोई बेसिक जानकारी नही है। लेखक नागराज, डोगा जैसे सुपरहीरो को 'लल्लू लाल'साबित करने पे तुले हैं। क्यों??? इसका सबके पास अपना अपना जवाब है। कुछ भी हो लेकिन हम तो इसी क्लासिक नागराज को रियल नागराज मानते हैं और इसी के फैन बने रहेंगे।
Friday, September 9, 2022
मुलिक साहब का युवा डैशिंग नागराज
मुलिक साहब का युवा डैशिंग नागराज
कभी मेरे पास ट्रेडिंग कार्ड्स की एक गड्डी हुआ करती थी, लेकिन अब तकरीबन 10-12 ही बचे होंगे । उनमें से ये ट्रेडिंग कार्ड मुझे सबसे ज्यादा पसंद था, जो अब मेरे पास नहीं है "क्यों" उसकी एक वजह है👇
दूसरे मोहल्ले में मेरी सुनीता आँटी रहती थी जिनके दो लड़के थे सौरव और गौरव, दोनों बहुत शरारती थे ,जब भी कभी अपनी मम्मी के साथ हमारे घर आते मेरी निजी चीजों (कॉमिक्स , क्रिकेट का सामान, वीडियो गेम)का बैंड बजा जाते, उन्होंने मेरी कॉमिक्स तो बेहिसाब उड़ाई 😑साले ये दोनों मेरी जिंदगी के पिछले जन्म का पाप थे 😐
हालात ऐसे पैदा कर दिए थे दोनों ने अगर मझे कहीं बाहर जाना होता और ये दोनों राहु-केतु अपनी माँ के साथ मेरे घर टपक पड़ते तो मैं बाहर जाना रद्द कर देता था इस डर से की अगर मैं बाहर गया तो, साले फिर कुछ उड़ा ले जाएंगे,खैर सालों ने थोड़ी नरमी बरती और गड्डी में से 10-12 ट्रेडिंग कार्ड्स छोड़ गए
पर अफसोस ये वाला ट्रेडिंग कार्ड ले गए पर कोई नहीं सालों को बद्दुआओं में आज भी याद रखता हूँ ।🙃🙏
Sunday, September 4, 2022
ये उन दिनों की बात है ।।
आर विवेक आर जे जी की कलम से
अभी अभी सब टीवी पे एक सीरियल आ रहा था नाम था मैडम सर उसमे अभी अभी नागराज का जिक्र हुआ था।
एक पुलिस वाला कह रहा होता है कि बचपन में हमने नागराज बहुत पढ़ा था।
खुशी की बात है।
अब इसकी वीडियो सब कॉमिक्स समूह में फैल जायेगी।
और हम जैसे मासूम कॉमिक्स प्रेमी फिर खुश हो जायेंगे।
लेकिन।।।।
क्या ये खुशी से ज्यादा शर्म की बात नही है???
क्या हम इंडिया के कॉमिक्स प्रेमियों की बस इतनी सी ही औकात रह गई कि कही किसी सीरीज में,सीरियल में या किसी फिल्म में बाल भर जिक्र से ही खुशी से नाचते रहें???
140 करोड़ की भारत की जनता होते हुए भी अपने बचपन के हीरो को बस ये बाल भर के जिक्र से खुश न होके शर्म की बात है कि इन हीरो को असली मुकाम हासिल नहीं हुआ।
और न हो पाएगा।।।
उसका क्या कारण है।
क्या वजह है।
सभी जानते है लेकिन कोई अपने ऊपर जिम्मेदारी न लेके एक दूसरे के ऊपर इल्जाम थोपते नजर आते है।
काश इंडियन कॉमिक्स जगत लालची पब्लिकेशन के हाथो में न होता। और हमारे बचपन के हीरो को ऐसे भीख जैसी पब्लिसिटी न मिल रही होती।
🥹🥹
कॉमिक्स से जुड़ा वो खूबसूरत बचपन ।।
आर विवेक आर जे जी की कलम से❤️
90s में कॉमिक्स गली मोहल्ले, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड, बड़ी छोटी परचून की दुकान,स्टेशनरी की दुकान, यहां तक कि हमारे मोहल्ले के सैलून वाले भी कॉमिक्स बेचते या किराए पे दिया करते थे।
ये वो दौर था जब न मोबाइल न केवल टीवी हुआ करती थी। टाइम पास का अच्छा खासा जुगाड। महीने में दो सेट यानी 12 या 16 कॉमिक्स आती थी एक पब्लिकेशन की और डायमंड,राज,मनोज,तुलसी,राधा,परंपरा,पवन,नूतन,फोर्ट और अनेक पब्लिकेशन हुआ करते थे।।
सुनहरे दिन।
सुनहरी यादें।।
लेकिन तब इन दुकानों पे पोस्टर,बैनर, लड़ी झड़ी,स्टीकर, एलाना,फलाना, दुनियां भर का प्रचार करता था।
एक समय मैंने भी शॉप खोली थी कॉमिक्स की तो उन्होंने झोला भर के नोवल्टी,झालर पोस्टर बैनर ऐसे ही फ्री में दिए दे दिए थे।
कि जाओ ले जाओ सजा दो दुकान को।।
और आज कल।।??
कॉमिक्स जगत डूब गया।
सिर्फ एक पब्लिकेशन मार्किट में जिंदा है।
वो जिस मर्जी प्राइस में दे
लेना पड़ेगा।
वो फ्री नोवल्टी न दे।
तब भी कॉमिक्स खरीदना पड़ेगा।
कुछ सपोर्टर कहते है कि कॉमिक्स ही घाटे में जा रही है तुम्हे फ्री नोवल्टी की पड़ी है बे लालची।।।।।।।।
तो एक उदाहरण।।।।
नत्थू राम हलवाई की पूड़ी बहुत बढ़िया थी।
साथ में आलू की सब्जी,हरी चटनी, लाल चटनी, मिर्च का अचार।
दबा के पूड़ी बिका करती थी।।।
फिर धीरे धीरे नत्थू राम जी समझे कि कस्टमर तो पूड़ी के पैसे देता है अचार तो फ्री में देना पड़ता है।
तो उन्होंने अचार देना बंद कर दिया।।
कोई बात नही।
फिर नत्थू राम जी ने सोचा कस्टमर तो पूड़ी के पैसे देता है। चटनी तो फ्री में जा रही है।
चटनी भी बंद।
सेल थोड़ी सी गिरी लेकिन नत्थू राम जी ने सोचा कोई बात नही अचार ,चटनी तो बच ही रही है।
फिर नत्थू राम जी ने सोचा कस्टमर तो पूड़ी के पैसे दे रहा है सब्जी तो फ्री में जा रही है।
फिर सब्जी भी बंद।।।।।
अब?????
कस्टमर कैसे बिना सब्जी के पूड़ी खाए।
मत खाओ बहुत है नत्थू राम जी के पास तो कस्टमर।।।
धीरे धीरे नत्थू राम जी जो 90s में 10 हजार पूरी रोजाना बेचते थे आज वो ही नत्थू राम जी दिन भर में 100,150 पूड़ी बेच के खुश हो लेते है।
क्युकी अब उनको सब्जी,अचार,चटनी फ्री में नही देनी पड़ती।
जय हो नत्थू राम जी की।
न प्रचार, न कोई एड
बस सूखी पूड़ी बेचे जाओ
प्रभु जी के गुण गाते जाओ।
आज तल हम घाटे में जा लए है।
पहले जैसी पूड़ी ( कॉमिक्स) नही बिक रही
😜😜😜
Sunday, August 28, 2022
मैंने मेरी पहली कॉमिक्स मेरे आल टाइम फेवरेट सुपरहीरो नागराज की ही पढ़ी थी ।।
Sunil Mahindra जी की कलम से
मैने पहली कॉमिक्स ही नागराज की देखी थी मेरे चाचा जी Pardeep Jangra जी के पास "प्रलयंकारी नागराज" तब में काफी छोटा था नागराज के वो जेल तोड़ने वाला सीन वो नाग रसी पर चलने वाला सीन दिल में बस गया चाचा ने मुझे बताया नागराज के बारे में मुझे तो बहुत अच्छा लगा रात को जब पापा आए तो में जिद कर के बैठ गया की खाना तब खाऊंगा जब नागराज की कॉमिक्स लाओगे
तब पापा ने बड़े भाई से पूछा कहा मिलती हैं और कितने की आएगी तब बड़ा भाई रात को ही मुझे कॉमिक्स शॉप से न्यू कॉमिक्स दिला कर लाया तब से मेरी वजह से जो मेरे बड़े भाई चोरी छिपे कॉमिक्स पढ़ते थे वो भी घर में खुले में कॉमिक्स पढ़ते और रखने लगे ।।
Thursday, August 4, 2022
"नागराज" आतंकवादियों का यमराज
Jai kishor Rankawat जी की कलम से
नागराज से अपनेपन और जुड़ाव का एक कारण उसकी चिरपरिचित फाइटिंग स्टाइल भी थी... जैसे ...
उसके द्वारा खुद की लड़ाई अकेले लड़ना!
अजगर दांव!
फ्लाइंग किक!
स्नेक हैंड!
कराटे चॉप!
निहत्थों पर शस्त्र ना उठाना!
मुक़ाबला बराबरी का करना!
स्टाइल में ओवरकोट से बाहर आना!
कई तरह की कराटे, कुंग फू स्टाइल का यूज़ करना!
ये वो नागराज था जो सिर्फ नागशक्तियों के भरोसे नहीं था बल्कि नागशक्तियों के बिना भी काफी घातक था। दुनियां का सर्वश्रेष्ठ कुंग फू फाइटर माना जाने वाला नागराज वाकई लाजवाब था।
Thursday, March 24, 2022
डायमंड कॉमिक्स का वो खूबसूरत दशक ।।
आशुतोष शर्मा जी की कलम से
1989 की बात है, जब मै पांचवीं कक्षा में था, उस समय बड़े भाई एक comic लाए थे फ़ौलादी सिंह और पागल रोबोट l फ़ौलादी सिंह और नागराज के हम दोनों भाई जबरा फैन होते थे l कॉमिक बहुत जोरदार थी जैसी आशा होती थी l परंतु उसका अगला भाग सितारों का दुश्मन आना बाकी था l बहुत इन्तेज़ार करवाया उस भाग ने l बस कैसे भी पूरी कहानी पढ़नी होती थी l उसके बाद आने वाली diamond comics का निराशा जनक दौर शुरू हो गया l कहानी से वो quality एकदम से गायब ही हो गयी l
Diamond comics में जहां प्राण साब के चरित्र बच्चों में अत्यधिक लोकप्रिय रहे वहीँ दूसरी ओर किशोरों को Ashwini ashu की लेखनी से सुसज्जित फ़ौलादी सिंह, महाबली शाका, लंबू मोटु जैसे चरित्र लुभा रहे थे l
यद्यपि अश्विनी आशु जी का नाम बहुत दिनों तक आगे भी डायमंड कॉमिक्स में छपता रहा परंतु कथानक की गुणवत्ता बहुत नीचे पहुंच चुकी थी l एक ब्लॉग से ये भी पता लगा कि आशु जी स्वर्गवासी हो चुके थे, फिर भी उनका नाम लम्बे समय तक चलाया गया l
डायमंड कॉमिक्स के उत्थान में जितना योगदान प्राण साब का रहा, आशु जी का योगदान उनसे बिल्कुल भी कम नहीं था l
यही कारण था कि हर उम्र वर्ग में डायमंड कॉमिक्स 80 के दशक में अपने समानांतर प्रकाशनों में सबसे लोकप्रिय थी l
आशु जी के कथानक तार्किक, रोमांचकारी और किसी graphic नॉवेल से कम नहीं होते थे l या यूं कहिये कि ग्राफिक नॉवेल को प्रसिद्ध बनाने में आशु जी की लेखनी का बहुत बड़ा योगदान है l
यद्यपि उस समय cheenu chtrikatha जैसे छोटे publishers ने famous novels को ग्राफिक नॉवेल सीरीज में उतारा जिसे परशुराम शर्मा सर और जगदीश पंकज सर ने अपने विशिष्ट ढंग से कॉमिक्स फॉर्म में उतारा l (सुलेमान का खजाना 4 भाग सीरीज, भटकती आत्मा 4 भाग सीरीज) परंतु डायमंड कॉमिक्स के एकाधिकार के चलते अधिक प्रसिद्ध ना हो सके l
उसकी अति लोकप्रियता ने उस समय मनोज कॉमिक्स को दूसरे स्थान पर रखा l डायमंड कॉमिक्स के नीचे आते आते राज कॉमिक्स के नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव का लगभग एकछत्र राज हो गया l
बहुत से अच्छे लेखक विमल चटर्जी, परशुराम शर्मा, अंसार अख्तर, हनीफ सर जैसे और भी लेखक कॉमिक्स जगत में आए l परंतु आशु जी जैसी कहानियों की छाप कभी कोई स्मृति पटल पर छोड़ नहीं पाए l
अब समय बदल गया हैl कॉमिक्स जगत का नया युग शुरू हो चुका है, नए प्रकाशनों का आगमन हुआ है l आशा है कि भविष्य में भी वैसी ही मौलिक उत्कृष्ट कथानक पुनः एक बार सभी पाठकों के हृदय पर शासन करे l























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