Thursday, April 1, 2021

सुपरहीरोज को रंग रूप देने वाले चित्रकार

 Jai Kishor Rankawat जी की कलम से -

Jahttps://www.facebook.com/jai.kishor.359 
काफी हद तक सच है कि एक आर्टिस्ट ही कैरेक्टर की आत्मा होता है। जिस आर्टिस्ट के कारण कैरेक्टर को पहचान मिलती है उसके चले जाने से कैरेक्टर भी निष्प्राण सा हो जाता है। इसका उदाहरण हमारा 'नागराज' भी है। मोहक और सजीला सा नागराज मुलिक जी के बाद किस तरह ' हल्क' में बदल गया किसी से छुपा नहीं है।

बेदी जी के बाद बांकेलाल खत्म सा हो गया।

मनु जी के बाद परमाणु और डोगा बेदम से हैं।

 

प्राण जी के बाद चाचा चौधरी, बिल्लू, पिंकी में वो अपनापन नहीं लगता।


Thursday, February 25, 2021

नागराज और शांगो



Vikas D जी की कलम से ✍ - 
मैं तो नागराज और शांगो के लिए इतना परेशान हुआ पूछो मत नागराज की शुरुआती कई कॉमिक्स पढ़ने के बाद काफी समय बाद जाकर मिली मेरा एक दोस्त था राजस्थान का ललित उसने मुझे दी थी दो कॉमिक्स के बदले में....... फिर तौसी और अप्सरा की आत्मा के लिए तो पूछो मत सैनिक पुस्तक भंडार के कितने चक्कर लगाए जो वहा नहीं मिली उससे थोड़ी दूर पर एक और दुकान थी अंडे वाले की वह भी कॉमिक्स बेचता था फिर तो मैं उसका परमानेंट कस्टमर बन गया.... लेकीन हरामखोर स्टीकर नही देता था!!!!!




Sunday, February 14, 2021

मेरा प्यारा क्लासिक नागराज जो हमारे हृदय में बसता है❤




                 विकास दास जी की कलम से


आज मुझे नागराज की शुरुआती पांच कॉमिक्स प्राप्त हुई वैसे तो मेरे पास नागराज का लगभग पूरा कलेक्शन है परंतु यह कॉमिक्स अत्यंत दुर्लभ थी और ढूंढने से भी नहीं मिल रही थी कई मित्रों के पास थी जिन्होंने मुझे आश्वासन भी दिया था कि वह मुझे दे देंगे लेकिन वह अपनी बातों पर खरे नहीं उतरे और मुझे यह कॉमिक्स नहीं मिली 

कॉमिक्स के साथ नागराज का स्टीकर्स बेमिसाल है और सबसे बड़ी खास बात सभी स्टीकर्स क्लासिकल नागराज के है जो कि हमारे हृदय में बसता है......

कुल मिलाकर कॉमिक्स बहुत ही शानदार है बस अगर नॉर्मल पेपर में छपती तो और ज्यादा बेहतर होता लेकिन कोई नहीं मार्केट में ब्लैक मार्केटिंग से लोग पुरानी  कॉमिक्स के नाम पर अंधाधुंध पैसा मांग रही थे कम से कम उनके इस घटिया आचरण पर लगाम तो कसी की जा चुकी है 

कॉमिक्स और बेहद ही शानदार है और इसको कॉमिक्स के साथ जो सबसे अच्छा गिफ्ट मेरे पास आया वह जिस पैकिंग में आया था वह पान्नी मुझे बेहद पसंद है अब इसे कॉमिक्स पढ़ते हुए एक-एक करके पटपट कर के फोडूंगा🤣😂 पन्नी से खोलते हुए इस कॉमिक्स को देखकर मेरे तीनों कुत्ते टिल्लू पाचू और ब्लैक तुरंत कॉमिक्स पर चढ़कर बैठ गए शायद वह भी इन कॉमिक्स को पढ़ना चाहते हैं.......

बाकी संजय गुप्ता जी को हृदय से आभार जिन्होंने बड़ी मेहनत और शिद्दत से अपने काम को अंजाम दिया और उन्होंने पुराने पाठकों की दिल की बात सुनी जो उन्होंने मार्केट से लगभग गायब हो चुकी कॉमिक्स को पुनः प्रकाशित किया आशा करता हूँ वो भविष्य में इसी तरह निरंतर पुरानी क्लासिक चित्रकथाओं को रीप्रिंट करते रहेंगे धन्यवाद जय हिंद जय भारत ।।




Sunday, February 7, 2021

एक दौर ऐसा था जब कॉमिक्स का आकर्षण ही अलग था ।

 


            Jai Kishor Rankawat जी की कलम

पहले कॉमिक्स टाइटल बड़े रोमांचक होते थे...

जिन्हें देखकर ही कॉमिक पढ़ने का मन होने लगता था..


मेरे कुछ फेवरेट टाइटल..


नागराज और काबुकी का खजाना

नागराज और शंकर शहंशाह

नागराज और कोबरा घाटी

नागराज और जादूगर शाकुरा

नागराज और बेम बेम बिगेलो

नागराज और बकोरा का जादू

नागराज और जादू का शहंशाह


और भी कई धांसू टाइटल रखे जाते थे।


लेकिन धीरे धीरे टाइटल बदलने लगे...


अब टाइटल कुछ आधुनिक और क्लिष्ट होने लगे..


स्नेक पार्क, सम्मोहन, विष अमृत, केंचुली, कोहराम, विध्वंस, परकाले आदि।


 आप फर्क देख सकते हैं।


ऐसा ही ध्रुव की कॉमिक्स के साथ भी हुआ..


जैसे - 

रोमन हत्यारा, आवाज की तबाही, चुम्ब का चक्रव्यूह, खूनी खिलौने, वू डू, रूहों का शिकंजा, मौत का ओलम्पिक, किरिगी का कहर आदि क्लासिक टाइटल थे।


अब ध्रुव के टाइटल...

ध्रुविष्य, डिजिटल, फरिश्ता, रोबिन हुड, सुपरमैन जैसे होने लगे।

 

ये मेरे विचार है।

हो सकता है कोई मित्र इस से सहमत न हो पर मुझे ऐसा लगा... इसलिए शेयर किया। 🙏

बांकेलाल और तालाब के चोर

नागराज और अजगर का तूफान

बकोरा का जादू

नागराज और थोडांगा

नागराज और काबूकी का खजाना

खूनी कबीला

आखिरी दांव

आदमखोरों का स्वर्ग

प्रतिशोध की ज्वाला

चैम्पियन किलर

मुझे मौत चाहिए

वू- डू

बहरी मौत


Saturday, January 30, 2021

बचपन में कॉमिक्स को लेकर वो प्यारी बेचैनियां

                 देवराज शर्मा जी की कलम से👇
 हमारे कॉमिक्स पढ़ने के दिनों में हमारे अंदर कॉमिक्स को लेकर बहुत बेचैनियां रहती थी जैसे नया सेट कब आएगा, और आ गया तो अपनी पसंद की कॉमिक्स को पढ़ने के लिए या खरीदने के लिए पैसे उस वक़्त होंगे कि नही, स्टीकर कैसा होगा इत्यादि ।।

इन्ही सब बेचैनियों के बीच में मेरी सबसे बड़ी बैचैनी जानते हो दोस्तो क्या थी ? वो बेचैनी थी अधूरी कहानी वाली कॉमिक्स यानी कि वो कॉमिक्स जो दो पार्ट या कभी कभी 3 पार्ट मे आती थी ।।


और बेचैनी तब बढ़ जाती थी जब कहानी ऐसे समय पर रुक जाती थी जहाँ उस कॉमिक्स पढ़ने का exitement पढ़ते पढ़ते अपने चरम पर पहुच चुका होता था , परंतु अचानक पता चलता है कि कहानी रोक दी गयी है और अगले भाग मे पूरी होगी, उस समय दोस्तो याद करो अपनी क्या हालत होती होगी मन बेचैन दिल परेशान आंखे हैरान ये सोचकर कि न जाने आगे क्या होगा यकीन मानो उस रात नींद भी नही आती थी और हम लेटे लेटे आगे की कहानी की कल्पना शुरू कर देते थे ।।


और सबसे बड़ा सितम ये होता था अधूरी कहानी के बाद हमारी बेचैनी को भड़काने के लिए कुछ डरावने सवाल छोड़ दिये जाते थे जैसे :- अब क्या होगा ?, क्या वो उसको मार सका ?, वो कौन था ?, इत्यादि 


फिर तो बेचैनी की आग तब तक भड़की रहती थी जब तक कॉमिक्स का अगला पार्ट हाथ मे नही आ जाता था और उसको पढ़ने के बाद ही बेचैनी की ज्वाला शांत होती थी


और उन दिनों तो इस अधूरी कहानी की रेस मे अपना क्लासिकल नागराज 1st था इसकी पहली कॉमिक्स से ले कर इच्छाधारी नागराज तक जितनी भी कॉमिक्स आयी उनमे से बच्चो के दुश्मन को छोड़कर सभी कॉमिक्स पार्ट्स मे थी

तो मेरे प्यारे मित्रो ये थी मेरी कॉमिक्स लाइफ की सबसे बड़ी बेचैनी 

आप सब की बेचैनी क्या थी कमेंट बॉक्स मे जरूर सांझा करे, पढ़ कर अच्छा लगेगा

आपके कमैंट्स के इंतजार मे,


आपका अपना 

देवराज शर्मा









Sunday, January 17, 2021

क्लासिक नागराज का वो स्वर्णिम दौर ।।


        Jai Kishor Rankawat जी की कलम से

                         क्लासिक नागराज...

राज कॉमिक्स से जुड़ी कुछ यादों में सबसे खास है पुराने ऐड। जब कॉमिक्स के पिछले पेज पर इस तरह के ऐड देखता था तो रोमांच का एक सैलाब से फूट पड़ता था। उस वक़्त नागराज के गिने चुने कॉमिक ही मैंने पढ़ रखे थे। और जब भी नागराज के प्रकाशित कॉमिक्स की लिस्ट देखता था तो वो सनसनीखेज नाम पढ़कर बहुत कल्पनाएं करता था। जब नागराज के इस तरह के बैक कवर ऐड पर नज़र जाती तो मानो दिमाग झनझना उठता। बस कल्पनाओ की उड़ान। टाइटल कवर के चित्र देख कर ही कहानी का अनुमान लगाता रहता था। मुझे नागराज, ध्रुव, बांकेलाल के इस तरह के टाइटल कवर के चित्र वाले ऐड  बहुत ज्यादा पसंद थे।

नागराज के इन कॉमिक्स में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया कोबरा घाटी के कवर ने। इसके साथ ही खूनी कबीला, लाल मौत, नागराज और कालदूत जैसे धमाकेदार कॉमिक्स मन पर छाए रहते। अब नागराज के नए कॉमिक तो मेरे हाथ मे आ रहे थे लेकिन पुराने कॉमिक्स उपलब्ध नहीं थे। उनके प्रति मेरी तड़प भी बढ़ती जा रही थी। दरअसल मैं जिस शहर में रहता हूं वहां एक दो दुकाने ही थी जो मैं जानता था। वहां नए सेट तो कभी कभार मिल भी जाते लेकिन पूर्व प्रकाशित कॉमिक्स अब नहीं मिल रही थी। मैंने नागराज को 'काबुकी का खज़ाना' से पढ़ना शुरू किया था।इस से पहले वाले कॉमिक्स मुझे मिल नहीं रहे थे। धीरे धीरे ये कॉमिक मेरे हाथ में आने लगे। कोई खस्ता हालत में होते तो कोई बेहतर हाल में मिल जाते। इनकी खोज कुछ इस तरह से की मानो बगदाद की पुरानी गलियों में कोई रहस्यमयी चीज़ ढूंढी जा रही हो। एक एक कॉमिक् कीमती हीरे की तरह जमा की। मुझे आज भी ये कैप्शन रोमांचित करते हैं- "राज कॉमिक्स में पढ़िए नागराज के धमाकेदार कॉमिक्स/नागराज के सनसनीखेज कॉमिक्स/ नागराज के हैरतअंगेज कॉमिक्स।"

आज नए कॉमिक्स आते जा रहे हैं लेकिन उनमें वो बात कहां जो  इन अद्भुत 32 पन्नो में थी।

आज मेरे पास ये सारी कॉमिक्स है। सहेज के रखी है। इनमे बचपन जो है मेरा। 😊❤️











Saturday, January 16, 2021

तौसी और गिद्ध

 


               Vikas D जी की कलम से✍

     तौसी और गिद्ध कॉमिक्स से बहुत सी यादें जुड़ी है। 

एक समय ऐसा था जब तौसी और गिद्ध कॉमिक्स का बेसब्री से इंतज़ार था । गिद्ध की एक अलग ही खतरनाक छवि बन गयी थी कॉमिक्स आने से पहले दिलो-दिमाग में

जब मैं सिक्स क्लास में था तब इसे लास्ट टाइम देखा था..... हमारे यहां जहां अब हम रह रहे हैं पहले एक वियावान जंगल था और रेलवे पटरी के पास काफी बंजर भूमि भी थी... उस बंजर भूमि बीच में एक जोहड़ था जहां वाल्मीकि समाज के लोग की पूरी बस्ती है इस बस्ती के बीच में से हमारे स्कूल को जांने वाला एक शॉर्टकट रास्ता था अक्सर मैं और मेरा भाई पंकज इसी रास्ते से जाया करते थे  उस जोहड़ के आसपास हजारों हजार की तादाद में  गिद्ध पाए जाते थे और वह साइज में इतने बड़े हुआ करते थे जिन्हें देखकर डर जाया करता था मेरा भाई पंकज मुझे बोलता था कि गिद्ध आदमियों को लेकर उड़ जाते हैं तो मैं इनसे बहुत डरता था.....मेरा भाई पंकज तो ऐसा करता था जैसे हम उस जोहड़ के नजदीक पहुंचे था वैसे ही मुझे छोड़कर घर की ओर भाग जाता था मैं डरता डराता रोता हुआ घर आता था...... लेकिन एक लंगडी पटवारी ने अवैध तरीके से लोगों को बेच दिया है अब यहां पर पूरी कॉलोनी बस चुकी है गिद्ध नहीं पाए जाते..... अब यहां भेड़िए मिलते हैं इंसानी रूपी भेड़िए है मेरे पास एक फोटो है ढूंढ कर अपलोड करूंगा जिसे मेरे भाई ने खींचा था इसमें मैं और मेरा एक दोस्त खड़े हुए हैं और पीछे एक  विशालकाय गिद्ध बैठा हुआ है हमारे घर की छत पर......





Friday, January 15, 2021

मेरे बचपन का प्यारा साथी मेरा क्लासिक नागराज❤

 



         Jai Kishor Rankawat जी की कलम से

बात तब की है जब मैं मैंने राज कॉमिक पढ़ना शुरू किया ही था। अब तक मैं नागराज, ध्रुव, बांकेलाल और भोकाल जैसे केरेक्टर्स से जुड़ चुका था।तब तक मैंने नागराज की कॉमिक ' काबुकी का खजाना', 'नागराज और थोडांगा', 'खूनी खोज', 'खूनी यात्रा' पढ़ी थी।  फिर मेरे हाथों में आई नागराज की एक शानदार कॉमिक -  'नागराज का दुश्मन'! कॉमिक का टाइटल कवर देखकर सम्मोहित सा हो गया। ओवरकोट से निकलता नागराज बिल्कुल स्टाइलिश हीरो की तरह लग रहा था। जब कॉमिक के पन्ने पलटे तो नागराज का खलनायक रूप देखकर दिल बैठ गया। अंदर ही अंदर घुट गया। समझ ही नहीं सका कि मेरा सुपर हीरो इस तरह विलेन कैसे बन गया। बालमन घबरा गया कि नागराज किस तरह बदनाम होकर रह जायेगा। लेकिन जब एंट्री हुई रियल नागराज की।और जिस तरह से उसने नागदंत का पर्दा फाश किया सच मे सुकून मिल गया। कि हां... सब कुछ ठीक है। इसी तरह की कई फीलिंग्स जुड़ी है। हर कॉमिक के साथ। बैठे बैठे कभी जब बचपन मे लौटता हूँ तो ये सब याद करके होठों पर एक मुस्कान खेल जाती है। सच में क्या क्लासिक दिन थे वो! क्या क्लासिक नागराज था हमारा!!!