Tuesday, January 11, 2022

नागराज और बुगाकू बनाम नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव


Devraj Sharma जी की कलम से 

नागराज और बुगाकू बनाम नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव

मेरा वोट तो दोनों को बराबर ही जाता है पर 1% अधिक नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव को ज्यादा जाता है जिसका एक बड़ा मासूम सा कारण है

उन दिनों जब प्रचारित किया गया कि राज कॉमिक्स अपनी पहली विशेषांक निकाल रहा है तो हम विशेषांक का अर्थ भी नही जानते थे बस, बातों, मित्र पंचायतों और सबकी जिरह से अपने आप अर्थ निकाल लिया था कि शायद विशेषांक का अर्थ होता होगा डबल कॉमिक्स यानी 32 की जगह 64 पेज.....हम खुश हुए कि हमने सही टप्पा मारा था

फिर घर के बड़ो से पूछा कि विशेषांक का क्या अर्थ होता है बताया गया स्पेशल एडिशन वो पल्ले पड़ गया क्योंकि हम KV के छात्र जो थे😂 

अब स्पेशल एडिशन ने हमारे दिल मे एक स्पेशल जगह बना ली कि कब आएगी ये स्पेशल कॉमिक्स हम रोज दिन और पैसे गिनने लगे, 

और दिमाग के दो हिस्से हो गए एक जो डेली रूटीन में लगता था और दूसरे दिमाग में नागराज, ध्रुव,मैगनेट स्टीकर, 64 पेज, मिस किलर, स्टोरी, और सबसे विशेष इसका चित्रांकन इत्यादि कैसा होगा यही सब घूमता रहता था 


आखिर 1991 का वो दिन आ ही गया जब अचानक ये कॉमिक्स स्कूल के सामने वाले बुक स्टाल पर बाकायदा स्टैंड पर डिस्प्ले दिखी, कवर देख कर तो रोम रोम खड़ा हो गया और दूसरा दिमाग बोला क्या कवर बनाया है यार....नागराज एक कांटो वाले लोहे के आदमी को मुक्का मार रहा है और उसके मुक्के से खून निकल रहा है, मन किया कि बस अभी इस स्पेशल एडिशन को अपना बना लू 

पर हाय मेरा दुर्भाग्य जमा किये पैसे घर पर थे 

मैं दौड़ दुकान पर गया अपनी बस का किराया 2 रुपया अंकल को दिया और कहा कि अंकल ये मेरे लिए बुक कर लो वो मुझे देख कर मुस्कुराए और बोले ठीक है बेटा

फिर मैंने अपना सर खुजाया और पहले वाले दिमाग से सोचा यार ये तो घर जाकर अपने सेक्टर से ही खरीद लेता ?

ये कल सुबह मिलेगी और घर जाकर आज ही खरीद कर पढ़ सकता था....बे मतलब बस का किराया अंकल को दे दिया इतने में असेंबली बेल बज गयी तो स्कूल में घुसना पड़ा 

पूरा दिन मेरा दीदा पढ़ाई में नही लगा वो कवर और मैगनेट स्टीकर ने मेरे दूसरे दिमाग के साथ मिलकर पहले वाले दिमाग पर भी कब्जा कर लिया 

खैर.... जैसे तैसे छुट्टी हुई किराया मैंने अपनी मैडम से ये कह के मांग लिया कि मेरे पैसे कही गिर गए और घर आ गया

आकर जल्दी से खाना खाया और भाग कर अपने परम मित्र के पास गया संयोग से उसका भी नाम नितिन था , उस से उसकी लाल हीरो साईकल मांगी बेचारे ने अपने भाई और मम्मी से छुप कर मुझे चाबी दी 

और मैंने साईकल सेक्टर 35 से जो दौड़ानी शुरू करी तो सेक्टर 31 पर रुकी,

फटा फट स्टाल वाले अंकल को 13 रुपये देकर वो स्पेशल एडिशन अपने नाम कर लिया 

मन तो कर रहा था कि एक एक पेज यही खड़ा खड़ा पढ़ डालू

लेकिन दोस्ती याद आ गयी, उसकी साईकल जल्दी लौटानी थी 


सो दुत्र गति से बापस आया, दोस्त को दिखाई वो बोला भाई सबसे पहले मुझे दियो पढ़ने को 


घर आकर सबसे पहले तो मैगनेट स्टीकर को चिपकाया फ्रिज पर और फिर अपने कमरे में बिस्तर पर दो तकिए लगा कर आराम से लेट कर दरबाजा लगा कर कॉमिक्स पढ़नी शुरू करी 

क्या बताऊँ एक एक पेज जैसे रोमांच का गुलदस्ता....

और सबसे बड़ा रोमांच सूमो फाइटर से लड़ाई के समय जब नागराज को ध्रुव कहता है "नागराज तुम और सूमो फाइट ?" तब नागराज का उत्तर "नागराज को चैलेन्ज की लड़ाई में ही मजा आता है दोस्त"

और दूसरा "नागराज अपनी लड़ाई खुद ही लड़ता है"


तो दोस्तो ये था वो 1% अधिक का कारण जिसकी वजह से नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव मेरे लिए थोड़ी सी अधिक स्थान रखती है ।।

Saturday, January 8, 2022

क्लासिक नागराज का अनंत अंतहीन सफर



 सफर अनंत था मेरा" मुश्किल थी सफर की हर डगर


 हर सफर में मिल रहे थे दुश्मन तो दोस्तों की भी कमी न थी, नहीं परवाह थी अंजाम की बुलन्द थे हौसले मेरे  हौसलों में कोई कमी न थी,नहीं सुकून था ज़िंदगी में

जब तक दुनियां में आतंकवाद के बादल छाए थे ,इन्हीं बादलों का वध करने हम इस धरा पर आए थे ।।

याद आता है सफर अपना , मैंने खुद से कहा था ना

है थकना ना ही रुकना ।।

चलता चला जा रहा था मैं पकड़े इस अनंत सफर की डोर नहीं नज़र आ रहा था इस सफर का कोई अंत न कोई छोर ।।


 नागराज और थोडांगा कॉमिक्स ये दृश्य भावुक कर गया था ।

कॉमिक्स खत्म होने पर भी काली के जाने का दुख  😓



नागराज का सफर

 Abin Sinha जी की कलम से


हाल ही में मैंने मेरे खास दोस्त नितिन सिंह जी के "नागराज और थोडांगा" से जांबाज हाथी काली के बलिदान और योगदान पर की पोस्ट पढ़ी जिसने मुझको भावुक और प्रेरित किया क्लासिक नागराज के उन पात्रों को याद करने का जो सफर में साथ रहे पर दुर्भाग्यवश उनका शरीर साथ छोड़ गया..

आइये मैं ऐसे दस पात्र को मेंशन करता हूँ आप लोगों को और याद आये तो जरूर बताना

(1)फ्लोरिडा ( नागराज का इंसाफ)

(2)मास्टर सुजुकी (नागराज की हांगकांग यात्रा)

(3) काली(नागराज और काबुकी का खजाना)

(4)ओसका (नागराज और थोडांगा)

(5) विषप्रिय( नागराज और शंकर शंहशाह)

(6)वान(नागराज और तूफान-जू

(7) टर्बो (नागराज और बेम बेम बिगेलो)

(8) डिसूजा(नागराज और मिस्टर 420)

(9)रोमो (नागराज की कब्र)

(10)ब्रूनो द किड( नागराज और अजगर का तूफान)



बॉलीवुड फिल्मों से कॉमिक्स कनेक्शन

Devraj Sharma  जी की कलम से✍️
एक ऐसा दौर जो मुझे आज भी याद आता है
एक ऐसा दौर जब से बॉलीवुड फिल्मों से जुड़ी है कॉमिक्स की यादें
"नगीना का जाल" के साथ  अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित की फ़िल्म ज़िंदगी एक जुआ रिलीज हुई थी ।।

क्योंकि मुझे अच्छे से याद है 18 मई मेरा जन्मदिन था तो मेरे भैया और बहन मुझे यही मूवी दिखाने ले गए थे और जब देख कर बापस आये तो मैंने गिफ्ट मांगा तो भाई को पता था कि इसको क्या चाहिए सो उसने मुझे 15 रुपये दिए और बोला मुझे पता है तेरे गिफ्ट के लिए ये काफी है 
मैं खुशी खुशी मार्किट गया और पहुच कर खुशी का ठिकाना न रहा ये देख कर कि नगीना का जाल आ गयी है और मैंने तुरंत प्रभाव से खरीद ली ।
फिर
बच्चो के दुश्मन के साथ
जैसी करनी वैसी भरनी

किशन कन्हैय्या और नागराज का दुश्मन 

शाकुरा के साथ हम भी रिलीस हुई थी शायद

तूफान जु और खिलाड़ी 

अभी तो यही याद आया है बाकी खूबसूरत यादें भी आपके साथ साझा करता रहूंगा ।।


Tuesday, October 5, 2021

क्लासिक नागराज का वो स्वर्णिम दौर-2


देवराज शर्मा जी की कलम से✍️
 1986 का समय था जब शायद मैं कक्षा 2 का छात्र था और गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गयी थी 

बड़े भाई बहनों की मदद से मैंने अच्छी हिंदी पढ़नी सीख ली थी तो जब ही चार आने या आठ आने मिलते तब कॉमिक्स की दुकान पर जाकर उधर ही बैठ कर किराए पर कॉमिक्स पड़ता था

उन दिनों नागराज के नाम से बिल्कुल अनभिज्ञ था, मुझे सिर्फ मनोज और राज की स्टोरी कॉमिक्स ही पढ़ना पसंद था 

गर्मियों की छुट्टियों के एक दिन बड़े भैया नागराज की कब्र लेकर आये अपने दोस्त से 

उसका कवर देख कर बहुत अच्छा लगा , मैंने भाई से पूछा भाई ये नागराज कौन है ? तो भाई का जबाब था ये पढ़ खुद समझ जाएगा 

38 पेज की वो कॉमिक्स पढ़ने के बाद रोमांच से भर गया मैं, 

मैंने सोचा कि क्या हीरो है जो हर तरह की फाइट जानता है, हाथों से सांप निकलते है, मुह से विषफुंकार, और किसी की आंखों मैं देख ले तो वो उसका गुलाम....

रोमो जैसे फाइटर से टक्कर और अंत मे एक सस्पेंस कि अब क्या होगा ????


उन दिनों छुट्टियों में राज वाले हर 10 दिन में एक नया सेट निकाल देते थे तो जल्द ही नागराज का बदला हाथ लगी 

फिर तो बस मैं और मेरा नागराज यही मेरी दुनिया थी

हांगकांग यात्रा और शांगो बढ़िया लगी, उसके तुरंत बाद आई खूनी खोज जो एक नए चित्रांकन और बहुत कसी हुई पटकथा के साथ थी, यहाँ हमने बिल्कुल नए तरह के नागराज को पढ़ा 

फिर तो खूनी यात्रा, नागराज का इंसाफ, खूनी जंग, प्रलयंकारी नागराज, खूनी कबीला, कोबरा घाटी जैसी महानतम कॉमिक्स पढ़ने का सौभाग्य मिला 

हर एक कॉमिक्स में जैसे परंपरा थी कि नागराज को एक मित्र तो मिलता ही था, इसके कुछ खास मित्रो के नाम है रोमो, तिकाशी, फ्लोरिडा, डॉन, टीना, सुगा, टोनी, सौडांगी, रुएबा खातून (मेरे बचपन का क्रश)☺️☺️☺️



Saturday, September 25, 2021

क्लासिक नागराज ही सही मायनों में असली नागराज था ।।

 

संदीप जुयाल जी की कलम से 

वाकई में क्लासिक नागराज का कोई तोड़ नही है उसके आगे सच बताऊँ तो आज का और महानगर का नागराज फीका ही लगता है फिर बात करे आर्टवर्क की या  कहानी की नए कैरेक्टर्स नए विलेन्स नई नई जगह एक्स्प्लोर करना वाकई में एक मजेदार अनुभव था। मैंने बचपन मे अनुपम जी का नागराज ही पढा था और मुझे पसंद भी आता था। लेकिन जब मैंने  क्लासिक नागराज पढ़ा करीबन 6,7 (ठीक से याद भी नही है अब)  पहले तो मैं अनुपम जी की कहानी को भूल गया क्योंकि क्लासिक नागराज में ठहराव नही था उसे पता लगता कि इस जगह आतंकवादी गतिविधिया हो रही है वो निकल पड़ता था बिना सोचे समझे की यहां से आतंकवाद को उखाड़ फेंकना है तब उसके आगे पीछे कोई नही था पर महानगर में जाने के बाद वो भारती कम्युनिकेशन में जॉब करने लगा उसकी लाइफ में भारती और विसर्पी की इम्पोर्टेंस ज्यादा बढ़ गई बजाय इसके की  बाकी दुनिया मे आखिर क्या हो रहा है क्या नही उसे फर्क नही पड़ता वो भी मोह माया के जंजाल में फंसकर हमारे जैसा ही बन गया और अपने असल कर्तव्य से  भटक गया या भटका दिया गया।  क्लासिक का अंदाज ही निराला था आज के नए रीडर्स को क्लासिक पसंद नही आता लेकिन जिसने भी उसे बारीकी से पढ़ा होगा उसे उसकी इम्पोर्टेन्स समझ मे आएगी मैंने खुद उसे इस जमाने मे ही पढा है और यकीन मानो मुझे वो नागराज सब नागराज पर भारी लगता है आर्ट और कहानी के मामले में, अपने प्रतिद्वन्दी को पहला मौका देना, प्रतिद्वन्दी को अपने मार्शल आर्ट से आश्चर्यचकित कर देना, अपने दिमाग और साहस से हर समस्या का समाधान करना अपने स्टाइल में यहां तक कि अपने दुश्मन को सेल्यूट तक करना  वाकई में जबरदस्त लगता था नागराज का अपना ही एक स्टाईल था नागों का पैराशूट बनाना और ओवरकोट में तो लगता ही जबर था वो बंदा लेकिन अब हालत यह है कि नागराज जैसे इतने बड़े हीरो को पढ़ने का मन तक नही करता है। हर राइटर अपने मन से ही लिखे जा रहा है नागराज को 3,4 नागराज बनाने से बढ़िया था 1 ही नागराज पर मेहनत कर लेते तो आज नागराज की स्तिथि कुछ और ही होती ।।








Wednesday, July 21, 2021

क्या से क्या हो गया ।।




क्या से क्या हो गया... बेवफा... तेरे प्यार में...


देव साहब की क्लासिक मूवी 'गाइड' के एक गाने की ये लाइन्स याद आती है जब क्लासिक नागराज के बाद महानगर वाले नागराज को देखता हूँ तो। ज़रा गौर फरमाएं इन फ्रेम्स पर... 


पहले हमारे क्लासिक नागराज का क्या जलवा था। ध्रुव को बचाने के लिए किस कदर बेकरार सा हो गया था हमारा नागराज। क्या फीलिंग आयी थी कसम से??!! लगा मानो कोई ज्वालामुखी फ़टने वाला है। आवेश के मारे मुंह से विषफुंकार छूटने लगी। और पाठकों को लगा जैसे नागराज अगर छूट गया तो जलजला सा आ जायेगा। और ऐसा ही हुआ भी। जो दरिंदे ध्रुव और ओसाका काबिले के दो योद्धाओं पर भारी पड़ रहे थे नागराज के कहर ने उनको दो पलों में धूल चटा दी।


पहले ऐसा लगता था मानो ध्रुव भी नागराज का फेन है। नागराज की स्टाइल देखकर ध्रुव को जोश आता। और ये सब फबता भी था। ध्रुव एक तरह से नागराज का फॉलोवर भर था। जिसे बाद में नागराज का बॉस बना दिया गया।


ज़रा उस फ्रेम पर नज़र डालें जिसमे नागराज और ध्रुव firestorm से बच के भाग रहे हैं। भागते भागते नागराज ध्रुव को समझा रहा है कि क्या करना है??!! यानी नागराज बताता था, योजना बनाता था और ध्रुव फॉलो करता था। लेकिन आगे जा कर नागराज को ध्रुव के इशारों पर नाचने वाला साइड हीरो बना दिया गया।


अब बताइए कैसे हम बर्दाश्त करें कि रियल बॉस को अपनी असली गद्दी से हटा दिया गया... सिर्फ अपना सितारा चमकाने के लिए।।।





Wednesday, July 14, 2021

मेरा पहला सुपरहीरो "क्लासिक नागराज"

कलाजगत के पितामह आदरणीय प्रताप मुलिक जी और आदरणीय Sanjay Ashtaputre जी का वो टीन ऐजर नागराज बहुत याद आता है । जो मेरे और मेरे प्यारे मित्रों के दिल के बहुत ही करीब है । वो हमारा प्यारा क्लासिक नागराज जिसका हर कॉमिक्स प्रेमी दीवाना था । उस दशक के नागराज को जेहन में रखते हुए मैंने अपने तरीके से एक चित्रकथा बनाने का प्रयास किया है । जिसकी कहानी मेरे मित्र Sameer Luckyy जी ने लिखी है । जो मुझे बेहद रोमांचक लगी । जैसे ही ये कहानी पूर्ण होगी आप इसके आगे के चित्रों का मज़ा ले पाएंगे ...🙏🙏🙏🙏🙏
https://www.facebook.com/profile.php?id=100005284923590

जब एक यूनिक सुपरहीरो को कॉपी बना डाला

एक Unique सुपरहीरो जो अपराधियों के घर में घुसकर उनकी बखिया उधेड़ता था, या यूं कहिये शेर की मांद में घुसकर शेर का शिकार करता था । जो किसी एक क्षेत्र किसी एक देश का न होकर पूरे विश्व का था । जिसके नाम मात्र से सम्पूर्ण विश्व आतंकवाद जगत थर-थर काँपता था । दुनियां का एकमात्र ऐसा सुपरहीरो जिसने विश्व से अपराध और आतंकवाद को खत्म करने का बीड़ा उठाया था जिसके मजबूत कंधों पर सम्पूर्ण विश्व की रक्षा का भार था , जिससे दूसरों को सीखने की जरूरत थी । अब खुद गंगाधर(शक्तिमान)क्लार्क केंट(सुपरमैन) को कॉपी कर रहा था । जिसे दादा पोती(वेदाचार्य-भारती) ने मिलकर ऐडा बना कर पेड़ा खिला दिया😁

Friday, July 9, 2021

कॉमिक्स जगत में भी राजनीति और भेदभाव

Jai Kishor Rankawat Jee की कलम से
मित्रों,(मोदीजी वाला नहीं ही ही ही) अभी किसी ग्रुप में जा घुसा था। वहां कुछ जबरदस्ती के इंटलेक्चुअल्स बंदे बोल रहे थे कि कॉमिक्स किसी केरेक्टर के साथ भेदभाव नहीं करती। दरअसल वो ध्रुव और नागराज की बात कर रहे थे। उनका कहना था कि नागराज के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ। जो कुछ भी हुआ बिल्कुल निष्पक्षता के साथ हुआ। कॉमिक्स बनाने कालों के लिए तो सभी कैरेक्टर समान होते है। वो क्यों किसी के साथ भेदभाव करेंगे। जो स्टोरी की डिमांड होती है उसी हिसाब से कैरेक्टर के रोल सेट किये जाते हैं। इस पूरी बकवास का मतलब था कि वो ध्रुव को नागराज पर तरजीह दिए जाने को जस्टिफाई कर रहे थे। उनके मुताबिक जो कुछ भी नागराज के साथ हुआ और ध्रुव को जो हाइप मिली वो ध्रुव डिजर्व करता था। लेखक ने कोई भेदभाव नहीं किया। उन बंदों के मुताबिक ये सब हालात अपनाए जाने लायक है। तो अब पूरी डिटेल के साथ ये बताना जरूरी है कि नागराज क्या था और उसके साथ क्या किया गया!? कैसे पक्षपात करके नागराज जैसे नम्बर वन सुपर हीरो को दोयम दर्जे का साइड हीरो बनाया गया।?? तो उन लोगों को बता दिया जाए कि नागराज को जानने के लिए पहले ' नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव', तथा ' नागराज और बुगाकु' का ध्यान से अध्ययन करें। जो नागराज ध्रुव के बड़े भाई की भूमिका में था उसे हर बार पिटवा कर ध्रुव के पीछे खड़ा करने का भरपूर प्रयास किया गया। अब आती है बात पक्षपात की तो इसके लिए प्रलय, विनाश, राजनगर की तबाही, संहार, विध्वंस, परकाले पढ़े। जी न भरे तो ' नागाधीश' , 'वर्तमान', 'सम्राट' और 'सौडांगी' जैसे हृदय विदारक विशेषांक पढ़े। (ये सलाह नागराज के हार्ड कोर फेन्स के लिए नहीं है!!कहीं वो कॉमिक्स फाड़ न डालें!!) पक्षपात की हदें पार करते ये पक्षपात पूर्ण कॉमिक्स पढ़ने पर आपको पता चलेगा कि किस तरह नागराज को पीछे धकेला गया और अपने मानस पुत्र को जी भर के तरजीह दी गयी। कुछ उदाहरण देखिए.... 1. नागराज के सारे राज़ ध्रुव जानता है। 2. नागराज के अलावा नागद्वीप के बारे में सिर्फ ध्रुव जनता है लेकिन स्वर्ण नगरी की भनक नागराज को कभी नहीं लगने दी गयी।(बाद में किसी नई कॉमिक दी गयी हो तो पता नहीं।) 🙄 3. कालदूत- जिसे हराने में नागराज के पसीने छूट गए उसे ध्रुव आसानी से परास्त कर देता है। लेकिन धनन्जय, किरिगी, ज़िंगालु को नागराज के हाथों कभी नहीं पिटवाया। 4. हर कॉमिक्स में अंत में नागराज गलत साबित किया जाता है और ध्रुव की नैतिक जीत बताई गई। 5. नागराज के दोस्त ध्रुव और ध्रुव के दोस्तों द्वारा परास्त होते रहते है या पोपट बनाये जाते हैं। 6. हर 2-in-1 या मल्टीस्टारर में पूरा नेतृत्व ध्रुव को दे दिया जाता है और बाकी हीरोज (नागराज सहित) मुंह ताकते रहते है। 7. वो नागराज जिसकी अपनी खुद की स्ट्रेटेजी होती थी... खुद का अपना तरीका होता था, वो अब ध्रुव के इशारों पर नाचने लगा। 8. नागराज को दोयम दर्जा देने के लिए उसे कमांडो फोर्स के बच्चों द्वारा बचाया गया, एक साइड हीरो बनाने के लिए सम्राट' और 'सौडांगी' जैसे कई कॉमिक्स बनाये गए। जिसमे नागराज सिर्फ के ताकतवर हेल्पर के अलावा कुछ नहीं होता। अब इन सब बातों को वही समझ सकता है जिसने RC शुरू से पढ़ना शुरू की। जिन्होंने क्लासिक नागराज का वो aura देखा है। जिन लोगों ने शुरुआत ही कोहराम, प्रलय, विनाश जैसे कॉमिक्स से की वो ही उस घोर पक्षपात को उचित ठहरा सकते हैं। (यहाँ ये भी बता दूं कि मैं कोई ध्रुव विरोधी नहीं हूं, क्लासिक नागराज की तरह क्लासिक ध्रुव को भी उतना ही पसंद करता हूँ। लेकिन नागराज के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं। क्योंकि वो नम्बर 1 है और रहेगा।) बस अंत में उन इंटलेक्चुअल्स के लिए एक ही पंक्ति लिखना चाहूंगा... "कौन हैं ये लोग, कहाँ से आते हैं...."
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Thursday, April 1, 2021

सुपरहीरोज को रंग रूप देने वाले चित्रकार

 Jai Kishor Rankawat जी की कलम से -

Jahttps://www.facebook.com/jai.kishor.359 
काफी हद तक सच है कि एक आर्टिस्ट ही कैरेक्टर की आत्मा होता है। जिस आर्टिस्ट के कारण कैरेक्टर को पहचान मिलती है उसके चले जाने से कैरेक्टर भी निष्प्राण सा हो जाता है। इसका उदाहरण हमारा 'नागराज' भी है। मोहक और सजीला सा नागराज मुलिक जी के बाद किस तरह ' हल्क' में बदल गया किसी से छुपा नहीं है।

बेदी जी के बाद बांकेलाल खत्म सा हो गया।

मनु जी के बाद परमाणु और डोगा बेदम से हैं।

 

प्राण जी के बाद चाचा चौधरी, बिल्लू, पिंकी में वो अपनापन नहीं लगता।


Thursday, February 25, 2021

नागराज और शांगो



Vikas D जी की कलम से ✍ - 
मैं तो नागराज और शांगो के लिए इतना परेशान हुआ पूछो मत नागराज की शुरुआती कई कॉमिक्स पढ़ने के बाद काफी समय बाद जाकर मिली मेरा एक दोस्त था राजस्थान का ललित उसने मुझे दी थी दो कॉमिक्स के बदले में....... फिर तौसी और अप्सरा की आत्मा के लिए तो पूछो मत सैनिक पुस्तक भंडार के कितने चक्कर लगाए जो वहा नहीं मिली उससे थोड़ी दूर पर एक और दुकान थी अंडे वाले की वह भी कॉमिक्स बेचता था फिर तो मैं उसका परमानेंट कस्टमर बन गया.... लेकीन हरामखोर स्टीकर नही देता था!!!!!