Tuesday, November 19, 2024
कॉमिक्स के कवर्स पेज के साथ छेड़छाड़
Devraj Sharma Jee की कलम से ..........
वो किसी किसी के चूल उठती है ना, ये वो है
हम मानते है जिस समय ये कॉमिक्स आयी थी तो इसका कवर छुपा कर हमको इसे पढ़ना पड़ता था फ्लोरिडा के टू पीस ड्रेस की वजह से, जो कहानी की डिमांड भी थी क्योंकि फ्लोरिडा ने अपने कपड़े तभी उतारे थे जब उसको तैरना था और तैराकी पूरी होते ही बेचारी ने शराफत से कपड़े भी पहन लिए थे, कहने का मतलब है ये सब कहानी की डिमांड थी उसी के अनुसार चित्रांकन किया गया था, जिसको हम जैसे पुराने पाठक ही समझ सकते है
ऐसी कवर पेज की एक कॉमिक्स और आयी थी महाबली शका और पाप की देवी, उसका कवर पेज तो इस से भी ज्यादा वल्गर था और उस वल्गेरिटी के पीछे कोई कारण नही था बस ऐसे ही बना दिया उस कॉमिक्स के कवर को फैमिली वालो ने गलती से देख लिया तो मेरी बहुत खातिरदारी हुई थी सभी के द्वारा
खैर बात खूनी यात्रा कॉमिक्स की की कर रहा था मैं, खाली बैठे हमारे खालू अनुपम चाचा को चूल उठी कि इसका कवर वल्गर है इसको बदलना पड़ेगा, अब क्यों वल्गर था ये मैं बता चुका हूं लेकिन खालूजान ने इतना माथा नही लड़ाया और कवर चेंज कर दिया, और तो और इसी कॉमिक्स के नए प्रिंट में उस हर फ्रेम में फ्लोरिडा को पूरे कपड़े पहना दिए (अगर किसी बंधु के पास नई प्रिंट हो तो देख लेना) और उन्ही कपड़ो में फ्लोरिडा को मीलों तेरा दिया
इतनी जलन मुल्लिक जी से खालूजान की हमको तो समझ नही आई, आपके आयी हो तो बताना दोस्तो
मुझे भी बड़ा दुख हुआ था इस कॉमिक्स के साथ हुई छेड़ छाड़ को देख कर
इसके अलाबा प्रयलंकारी मणि के कवर को भी इसने छेड़ा था पर शुक्र है "देव कालजयी" का के इस कॉमिक्स में इसने विसर्पी को साड़ी नही पहनाई वैसा ही रखा
Saturday, November 9, 2024
एविल डेड मूवी और राज कॉमिक्स की थ्रिल हॉरर सस्पेंस सीरीज का कनेक्शन
"The Evil Dead" मुझे आज भी याद है, मेरे दोस्त सन्नी अरोड़ा ने मुझे ये फ़िल्म देखने को कहा था बहुत तारीफ की थी इस फ़िल्म की उसने , अब इत्तफाक देखिये जिस दिन उसके घर पहली बार गया उसी दिन ये फ़िल्म केबल टीवी पर आ रही थी , आंटी (सन्नी की मम्मी) ने मेथी के परांठे के साथ में चाय पीने को दी जिसने फ़िल्म का जायका और बढ़ा दिया, फ़िल्म खत्म हुई हॉरर फिल्मों की चर्चा होने लगी उसके बाद मुद्दा हॉरर कॉमिक्स का छिड़ गया , सन्नी ने बताया उसके पास थ्रिल हॉरर सीरीज की कॉमिक्स " तेहरवीं मंजिल"
"नरभक्षी संगीत" और "काल भैरव" है जो उसने मुझे पढ़ने को दे दी तीनों कॉमिक्स घर जाकर पढ़ी तीनों लाजवाब थी, काल भैरव, तेहरवीं मंजिल में गुरुजी Sanjay Ashtaputre जी का लाजवाब चित्रांकन था
जो कहानी को और बेजोड़ बना गया
और नरभक्षी संगीत तो मेरी आल टाइम फेवरेट है चंदू जी
और मुलिक साहब ने कॉमिक्स को और ज्यादा खूबसूरत बना दिया और कहानियां तो इन सभी कॉमिक्स की है ही शानदार 👌
Tuesday, October 1, 2024
कॉमिक्स विज्ञापनों की जादुई दुनियां
इन विज्ञापनों का आकर्षण अलग ही लेवल का था विज्ञापन देखते ही कल्पनाओं की अलग ही दुनियां में गोते लगाने लगता था मन
बालमन में इन चित्रकथाओं, विज्ञापनों का असर कुछ इस कदर था उन दिनों के सब कुछ असली लगता था
अगर उन दिनों पांच दस रुपए भी मिले कहीं से तो कॉमिक्स खरीदना सबसे पहली पसंद थी अपनी
या यूं कहिये मजबूरी थी अपनी,
लत ही कुछ ऐसी थी
कल्पनाओं की इस खूबसूरत दुनियां की, बाकी रही सही कसर पेपर स्टीकर्स , मैग्नेट स्टीकर्स और पोस्टर्स का लालच पूरी कर देता था,
Tuesday, August 6, 2024
70s 80s के दशक में पहाड़ पर बने विशाल पाषाण मुख की कहानियां
70s 80s में पहाड़ पर बने विशाल पाषाण मुख की कहानी भी बहुत प्रसिद्ध रही थी l इसका अंदाजा एक कहानी का विभिन्न प्रकाशनों द्वारा अपनाए जाने से पता चलता है l सबसे पहले इंद्रजाल में मेंड्रेक की रहस्यमय पाषाण मुख कॉमिक्स से लेकर डायमंड कॉमिक्स में चाचा भतीजा और पर्वत देवता के अतिरिक्त ताऊजी की भी एक कॉमिक्स (tauji 6 digest में ) इसी कहानी पर आधारित प्रकाशित हुई थी l
पुरानी कॉमिक के भूले बिसरे पन्ने 😊
Monday, August 5, 2024
नागराज और अदृश्य हत्यारा
Jai Kishor Rankawat जी की कलम से...............आज एक बड़ी डरावनी याद शेयर कर रहा हूँ... नागराज और अदृश्य हत्यारा के लिए जो झेला मैंने उसी के बारे में बताने जा रहा हूँ।। एक रोज मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि "मेरे पास नागराज और अदृश्य हत्यारा कॉमिक आने वाली है... अगर पढ़नी हो तो शाम को मेरी दुकान पे आ जाना।" उसके कपड़ों की दुकान थी और अक्सर हम कॉमिक शेयर किया करते थे। अब दुर्भाग्य से (मेरे लिए दुर्भाग्य) उसी दिन शाम को मुझे मम्मी पापा के साथ 'बनोरी' मे जाना था। बनोरी/बंदौली हमारे यहां उसे बोलते है जब दूल्हा घोड़ी पे बैठ कर बैंड बाजे के साथ निकलता है। जिसे निकासी भी कहते है। तो भई... बुझे मन से मैं बनोरी में शामिल हो गया। मम्मी पापा के साथ साथ चल रहा था। लेकिन मन नागराज और अदृश्य हत्यारा में अटका था। दिल कर रहा था भाग के मेरे दोस्त की दुकान पे चला जाउ और हाथों हाथ कॉमिक पढ़ डालू। दरअसल मेरे शहर में कॉमिक की बड़ी मारा मारी सी रहती है। गिनी चुनी 2 दुकाने थी जहां कॉमिक मिलती थी। कई बार हमें पॉपुलर कॉमिक मिल ही नही पाती थी। इसलिए मुझे ये डर था कि क्या पता कल ये कॉमिक मुझे मिले न मिले।। यही सब सोचते हुए मैं बनोरी में चला जा रहा था। चलते चलते वो मोड़ आ ही गया जिस पर मुड़ते ही मेरे दोस्त की दुकान पड़ती थी। बनोरी सीधी निकलनी थी और मेरा मन मुझे दुकान की तरफ मुड़ जाने को कह रहा था। बस इसी पल मेरा मन भारी पड़ गया और मैं चुपके से मम्मी पापा को बिना बताए भीड़ का लाभ उठाकर दोस्त की दुकान की तरफ मुड़ गया। दुकान पर पहुंचते ही मैंने अदृश्य हत्यारा हाथ मे ले ली और जी भर के उसे निहारा। फिर इत्मीनान से उसे बड़े मजे लेकर पढ़ा। जी खुश हो गया था मेरा। कॉमिक पूरी कर के दोस्त से टाइम पूछा। 7 बज गए। अब मैं बड़ी दुविधा में था। घर जाऊँ??? तो ताला होगा वहां।।। और बनोरी किस जगह गयी ये मुझे पता नहीं था। तो मैंने दोस्त की दुकान पे ही बैठे रहना उचित समझा। धीरे धीरे 8 बज गए। उसकी भी दुकान बंद होने का टाइम हो गया। अब मैं भारी कदमों से घर रवाना हो गया। इस बात से अनजान की मम्मी पापा पे क्या बीत रही होगी। मैं यही समझ रहा था कि वो लोग बनोरी में जाकर भोजन वगेरा कर के घर चले जायेंगे। अब मैं घर पहुंचा....
घर के बाहर पिताजी स्वागत के लिए तैयार खड़े थे...
मम्मी घर के बाहर ही चौकी पे रुआंसी बैठी थीं। मेरा दिल धाड़ धाड़ कर बज उठा। मैं तेजी से भाग कर घर मे घुस जाना चाहता था। लेकिन मुझे पकड़ लिया गया। कसम से बिना कुछ पूछे... बिना कुछ बोले मेरी जो सुताई हुई... बाप रे.... कपड़ों की धुलाई भी शरमा गयी।। फिर शुरू हुआ लेक्चर का दौर... मुझे बताया गया कि.... कैसे मुझे बनोरी में न पाकर उनके हाथ पांव फूल गए थे। हाथो हाथ बनोरी छोड़ कर उन्होने सारे शहर में मुझे ढूंढना शुरू कर दिया था। मेरी चिंता में उनका खाना पीना हराम हो गया था। मम्मी की तो हालत ही खराब हो गयी थी। बस थोडा और मैं लेट हो जाता तो पुलिस में रिपोर्ट कराने जाने वाले थे। आज मुझे इस बात की गंभीरता का एहसास होता है कि मैंने कितनी बड़ी नादानी की थी। लेकिन कुछ भी हो.... मैंने नागराज और अदृश्य हत्यारा पढ़ ही ली।😀
Sunday, August 4, 2024
मेघदूत और ठंडा सूरज
बात 1993 की तब मैं फिफ्थ क्लास में था पिताजी CIW में इंजीनियरिंग थे।
पिताजी के एक जूनियर अस्सिटेंट हुआ करते थे वह काफी पढ़े लिखे थे पिताजी ने उन्हें मेरे और मेरे भाई के लिए ट्यूशन टीचर के तौर पर रख लिया, मास्टर जी का नाम था तोताराम नेगी जी काफी इंटेलिजेंट थे और कड़क भी..... बिल्कुल जेम्स बॉन्ड टाइप, सिर पर वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर रिची रिचर्डसन की तरह हैट पहन कर आया करते थे, एक तो गोरा रंग उसे पर सिर पर हैट बिल्कुल जेम्स बॉन्ड जैसा लुक आता था,
नित्य ट्यूशन की क्लास चलने लगी, अब पड़ोस के 2/4 और दोस्त भी आने लगे। पिताजी की छुट्टी दो बजे होती थी तो वह पिताजी के साथ ही ट्यूशन पढ़ाने घर आ जाया करते थे।
एक रोज मास्टर तोताराम जी ट्यूशन पढ़ा रहे थे, शायद कुछ सवाल दिए थे जिनका उत्तर हम लिख रहे थे इतने में मास्टर जी के लिए चाय आई और वह चाय पीने में व्यस्त हो गए।
उस दिन मैं स्कूल से आते समय एक कॉमिक्स किराए पर लेकर आया था शायद कॉमिक्स का नाम "मेघदूत और ठंडा सूरज" था, बस इसी अति उत्साह में किताब की बीच में कॉमिक्स छिपा कर पढ़ने लगा, इतने में मास्टर साहब चाय पीकर कमरे में वापस आ गए और मुझे रंगे हाथ कॉमिक्स पढ़ते देख लिया....साथ ही एक मित्र नवीन पाल (अब दुनिया में नहीं रहा, बिजली के तार से झटका लगने के कारण रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, बाद में लगभग 10 साल बाद स्वर्गवास हो गया था) भी कॉमिक्स में तांक झांक कर रहा था
🤪
फिर क्या भिड़े मास्टर ने तो टप्पू को छोड़ दिया, लेकिन मास्टर तोताराम जी ने थप्पड़ दस मारे होंगे और गिना एक होगा🤣, और पिताजी बिलकुल भी जेठालाल की तरह नहीं थे जो सिर्फ डांट डपट कर ही छोड़ दे.....
DM बूट तशरीफ पर दो चार तो लगी ही होगी.....😭
नवीन पाल के भी चांटे लगने के बाद पूरी ट्यूशन क्लॉस साइलेंट मोड पर चली गई,
और कॉमिक्स चीथड़े चीथड़े.....😁
#मेरी_कॉमिक्स_की_दुनिया_और_पुरानी_यादें_vd
लम्बू मोटू और अपराधियों का बादशाह
लम्बू- मोटू और अपराधियों का बादशाह कॉमिक्स से
वो दौर याद आता है जब
दशहरे की छुट्टियां थी ज़िंदगी सिर्फ दो चीजों के इर्द गिर्द
घूम रही थी एक क्रिकेट का ग्राउंड और दूसरा दिल्ली 40 की कॉमिक्स की दुकानों की गलियां,क्रिकेट और कॉमिक्स दोनों से उस समय प्यार बेपनाह था बता पाना जरा मुश्किल था की दोनों में से प्यार किससे ज्यादा था उस समय
संजय कॉलोनी (बगल के मोहल्ले )में एक दोस्त था अनिल मलिक जिगरी दोस्त था मेरा उन दिनों मुझे अंगारा बहुत ज्यादा पसंद था लेकिन मेरा दोस्त अनिल क्लासिक नागराज का पक्के वाला फैन था, मेरा बालमन अंगारा की तरफ ज्यादा आकर्षित था गैंडे की खाल, लोमड़ी का दिमाग , गिद्ध की आंखे, शेर का दिल, हाथी का जिगर, गोरिल्ले का शरीर
बड़ा रोमांचक लगता था उन दिनों,
मेरे अजीज मित्र Ashish Agarwal जी तो अब भी बहुत बड़े प्रेमी है अंगारा के
उन दिनों कॉमिक्स मतलब सुपरहीरो ही था अपने लिये
ये बिना सुपरहीरो की कॉमिक्स बड़ी बेकार लगती थी उस समय राम रहीम, लम्बू मोटू, कर्नल कर्ण,राजन इक़बाल, अच्छे नहीं लगते थे उस समय पर
अब उल्टा है ये ही ज्यादा पसन्द है अब
तो चलिये अब मुद्दे की बात करते है लम्बू मोटू और अपराधियों की बादशाह कॉमिक्स की
लम्बू मोटू की कॉमिक्स के बारे में सुना था तो
लेकिन कभी पढ़ी नहीं थी, अनिल ने कहा उसके पास कॉमिक्स है लम्बू मोटू और अपराधियों का बादशाह अगर मैं चाहूं तो एक्सचेंज कर सकता हूँ बदले में उसे अंगारा की कॉमिक्स चाहिये अंगारा की कॉमिक्स तो नहीं थी मेरे पास इस कॉमिक्स के बदले मैंने उसे कॉमिक्स दी थी जम्बू की "जम्बू गया हार"
बाद में बड़ा दुख हुआ ये कैसी कॉमिक्स ले ली मैंने बदले
में 😊
पर आज लम्बू मोटू की कॉमिक्स बहुत पसंद है मुझे ❤️
Sunday, June 16, 2024
क्लासिक नागराज का स्पेशल संग्रह
prem Rathore जी की कलम से------------
जय बाबा गोरखनाथ
नागराज
हम सभी भारतीय बच्चो के बचपन का असली सुपर हीरो
प्रताप मुलिक जी ने वो यादगार आर्ट हमे दिया जो आज भी हमारे दिलों मे वही वैसे ही जीवत है
उनके बनाये कॉमिक्स आज भी पढ़कर हम उसी दुनिया मे खो जाते है
हमारे उस नागराज को पसंद करने वालो का आलम ये है की वो आज भी प्रताप जी के नागराज को ही अपने पास सहेज कर रखे है
इसी कड़ी मे हम सबके प्रिय Manish Gupta जी अपने खास सबसे बेहतरीन मेटेलिक पन्नों पे वही जादू फिर से बिखेरने वाले है
और वो सभी नागराज के चाहने वाले अपने पुराने पसंदीदा नागराज को एकदम नये स्वरूप मे देखने को बेकरार है
जिस प्रकार मनीष जी ने ध्रुव का बेमिसाल संग्रह ध्रुव के दीवानों को दिया
तो हम जैसे सभी क्लासिक नागराज के चाहने वालो की उम्मीदें नागराज के स्पेशल संग्रह के प्रति गई गुना बढ़ चुकी है
नागराज का ये आने वाला संग्रह सभी रिकॉर्ड तोड़ दे ऐसी मेरी शुभकामनाएं है
और इस संग्रह मे प्रकाशित नागराज के फ़ैंस के लिए तस्वीर आने वाली पीढी की जिनके पास रहेगी मनीष जी की क्लासिक नागराज की अनमोल विरासत💐
तस्वीर
प्रकृति राठौर
सुपुत्री प्रेम राठौर
सीहोर
मध्य प्रदेश
जून के महीने में कॉमिक्स का जुनून
गर्मियों की छुट्टी थी जून का महीना था मेरे दोस्त नीरज ने शर्ट के नीचे तिलिस्मदेव की कॉमिक्स "दुश्मन जादूगर" छुपा रखी थी मिशन था संजय कॉलोनी अनिल के घर जाकर दुश्मन जादूगर के बदले
पिरामिडों की रानी एक्सचेंज करना" तपती दोपहरी थी गर्म हवा के लू के थपेड़े थे पैरों में हवाई चप्पल निक्कर और टी शर्ट पर हौंसलो में कोई कमी न थी अनिल को घर के बाहर से आवाज देना(उन दिनों यही रिवाज था🤣) ठंडा पानी पीना और सुस्ता लेने के बाद कॉमिक्स बदलकर चल पड़ना पिरामिडों के रहस्मय संसार से रूबरू होने के लिये जल्दी जल्दी अपने घर की तरफ ।।
#जादू मुलिक साहब का❤️🙏
Friday, December 29, 2023
एक सुपर हीरो को उसके अंदर की सुपर पॉवर्स "सुपर" नहीं बनाती
Mohit Tripathi जी की कलम से -------- एक हीरो को सुपरहीरो उसके अंदर की सुपर पावर्स नहीं बनाती हैं। बल्कि एक हीरो सुपरहीरो तब बनता है जब वो अपने से सौ- हज़ार गुना ज्यादा शक्ति रखने वाले विलन से लड़ने की और उसको हराने की हिम्मत रखता हो।
जब नागराज की शुरुआत हुई उसमें सुपर पावर्स थीं। पर वो सिर्फ उस लेवल की थीं कि उसे एक आम इंसान से अलग पहचान दे सके। समय के साथ साथ विलन आये जो आम विलन से ज्यादा पावरफुल थे जैसा नागराज है वैसे, चाहे तुतेन खामन हो या थोडांगा। वो उसकी टक्कर के थे और ये लेखक की परिकल्पना थी कि लिमिटिड पावर्स के साथ ही नागराज को उन विलेन्स के ऊपर विजय कैसे दिलवाई जाए। ये कहानियां कहीं न कहीं रीडर्स को इंस्पायर करती थीं कि लिमिटिड सौरसेज़ में ज़िन्दगी की मुश्किल का कैसे सामना किया जाए। फिर समय बदला नागराज का लेखक बदला और अपने दिमाग का रत्ती भर उपयोग करके नागराज के सुपर पावर विलेन्स को हराने के लिए नागराज को हर बार एक नई शक्ति दे दी गई कभी तिष्क सर्प कभी नागफनी सर्प। वो रोंगटे खड़े करने वाला जो फैक्टर होता था की अब नागराज क्या करेगा?, वो इन जबरदस्ती की थोपी गयी सुपर पावर्स के नीचे दब कर रह गया।
एक आम इंसान के कांटेक्ट में रहने वाला नागराज, नए देशों में घूमने वाले नागराज, नए लोगों से मिलने वाला नागराज एक छोटे से शहर में गिने चुने लोगों के बीच में सिमट कर रह गया। बस बढ़ती गयी तो उसकी सुपर पावर्स।
फिर दौर शुरू हुआ 2 in 1 और मल्टीस्टार कॉमिक्स का जिसमें नागराज को एक हथियार की तरह दिखाया गया जो अपनी मर्ज़ी से न चल सकता है ना अपनी पोटेंशियल जानता है। दूसरे सुपरहीरो(जबरदस्ती के) आकर उसे बताते हैं कि वो क्या क्या कर सकता है।
राज कॉमिक्स की सीरीज में "नागराज की कब्र" भले ही नागराज की दूसरी कॉमिक्स हो पर सच तो ये है की नागराज की कब्र "विसर्पी की शादी" के बाद कि कॉमिक्स है।
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