Sunday, March 12, 2023
नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव "विशेषांक" की कहानी विकास दास जी की जुबानी
विकास दास जी की कलम से
90 के दौर में आज की तरह मोबाइल क्रांति का युग नहीं था उस दौर में हम सभी बच्चों के लिए मनोरंजन के नाम पर सिर्फ गिने-चुने ही साधन थे जिसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान कॉमिक्स का रहा, निश्चित तौर पर 90 के दशक में बच्चों और बड़ों के बीच कॉमिक्स का बहुत ही ज्यादा क्रेज था,
1992 में मेरी उम्र 10 साल हुआ करती थी , बाजार कॉमिक्स से पटा रहता था, दीवानगी ऐसी की परचून की दुकान तक में आपको कॉमिक्स मिल जाया करती थी, मैं खुद कई साल तक अंडा विक्रेता के यहां से कॉमिक्स लेता रहा था । जैसा क्रीज उस दौर में था संभवतः अब ऐसा नहीं है।
उस दौर में एक एक कॉमिक्स की प्रति लाखों में छपा करती थी और मार्केट में आते ही तुरंत ही बाजार से गायब हो जाती थी। निश्चित तौर पर वह कॉमिक्स इंडस्ट्री का स्वर्णिम दौर था।
मैं बचपन से ही नागराज का फैन रहा हूं, नागराज एक ऐसा हीरो जिसके पास शारीरिक बल, बुद्धि और सम्मोहन शक्ति के के साथ रोमांच पैदा कर देने वाली विश्व यात्राएं भी एक अलग ही लोक का आनंद देती थी।
उस दौर में सिर्फ नागराज हुआ करता था क्लासिकल नागराज जैसा कोई ऑप्शन नहीं था,
क्योंकि उस वक्त आज की तरह कई नागराज नहीं हुआ करते थे। इसीलिए हमारे लिए वही पुराना नागराज आज क्लासिकल नागराज हैं
नागराज के विलेन्स भी बड़े ही शानदार हुआ करते थे शुरुआती दौर में नागराज के दुश्मन एक आम इंसान की तरह दिखाए गए जो नागराज की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, उसके दुश्मनों की क्वालिटी को भी बढ़ाते चले गए जिसमें
जादूगर शाकूरा, थोड़ंगा, मिस किलर, नगीना जैसे विलेनस को कौन भूल सकता हैं।
इसी दौर में आई एक कॉमिक्स नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव का एक ऐड देखकर मन आश्चर्यचकित हो गया वह चित्र निश्चित तौर पर मेरे द्वारा देखें गए सबसे खूबसूरत चित्रकारी में से एक है विनोद जी द्वारा बनाया गया वह चित्र जिसमें नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव हवा में उड़ते हुए बाहर निकल रहे हैं को देख कर मन को आज भी तृप्त होता हैं।
यह कॉमिक्स निश्चित तौर पर कॉमिक्स इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हुई
जब यह कॉमिक्स प्रकाशित हुई तब नागराज और ध्रुव कॉमिक्स इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम हो चुके थे, और इन दोनों की अपनी एक बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग थी।
और इन दोनों को चाहने वाले बड़ी बेसब्री से नागराज और ध्रुव की एक साथ किसी कॉमिक्स में आने की कल्पना करते थे।
जिसे 90/91 के आसपास आई यह कॉमिक्स मेरी ऑल टाइम फेवरेट में से एक है। निश्चित तौर पर नागराज और ध्रुव की अब तक की सभी कॉमिक्स में से यह टॉप कॉमिक्स है,
बेहतरीन कवर पार्ट से सुसज्जित यह कॉमिक्स मेरे बचपन की इस यादगार कॉमिक्स है और इसी कॉमिक्स में पहली बार एक नए पात्र परमाणु के दर्शन हुए।
जानकर अति हर्ष हुआ कि इस कॉमिक्स का मुद्रण श्री मनीष जी द्वारा पुनः किया जा रहा है, दिग्गज कॉमिक्स चित्रकार प्रताप मुलिक जी के जादुई रंगों से सजे इस कॉमिक्स का बेसब्री से इंतजार है।
जिन कॉमिक्स हमारे बचपन को बेहद खूबसूरत बनाया है और आज भी हमारे मन को लुभाती हैं, मनीष गुप्ता जी के शानदार प्रयास द्वारा एक बार फिर जीने का अवसर मिल रहा है,
इस प्रयास के लिए मनीष गुप्ता जी को साधुवाद
विकास दास (रुड़की)
Friday, March 10, 2023
नागराज के साथ भेदभाव
Jai Kishor Rankawat जी की कलम से
मित्रों,
सबसे पहले तो ये क्लियर कर दू कि मुझे नागराज के साथ ध्रुव भी बहुत पसंद है। उसके कई कॉमिक्स मेरे जेहन में आज भी मजबूती से बसे है।' ग्रैंडमास्टर रोबो' , 'आवाज की तबाही' , 'खूनी खिलौने', 'dr वायरस', 'किरिगी का कहर' आदि।😊
समस्या तब शुरू हुई जब ध्रुव को नागराज पर तरजीह देना शुरू किया गया। जबकि हमने शुरू से नागराज को ध्रुव के बड़े भाई और उसकी ढाल के रूप में देखा है।😎
'नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव', 'नागराज और बुगाकु' में भी यही देखा गया था कि नागराज ध्रुव को बचाता है।
एक ऐसी फीलिंग बनी की जब तक नागराज है ध्रुव का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।😍
और ये सही भी थी। क्योंकि नागराज rc का लीडिंग हीरो है और उसको उसका स्थान मिलना भी चाहिए।😘
लेकिन ध्रुव को उठाने के चक्कर मे नागराज को इस तरह गिराया गया कि हम जैसे फेन्स के लिए असहनीय हो गया।😥
'तानाशाह', विध्वंस', 'परकाले', 'सम्राट', 'सौडांगी' जैसे विशेषांकों में नागराज की मिट्टी पलीद कर दी गयी।
'सौडांगी' में तो नागराज को विलेन बना कर दुनिया बचाने का सारा दारोमदार ध्रुव पर डाल दिया गया।🙄
हद तो तब हो गयी जब नागराज को कमांडो फ़ोर्स के बच्चों ने बचाया (नागाधीश में)!😤
ये सब कम से कम मेरे लिए तो बहुत कष्टदायी है।😣
" ध्रुव ज़िंदाबाद रहे इस से हमे कोई ऐतराज नहीं.....
लेकिन हमारा नागराज ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगा।"
😉
Thursday, March 9, 2023
महाबली शाका के वो शानदार कवर्स
सोनू सिंह रेमो जी की कलम से
ये कवर्स तो अब भी कॉमिक्स जगत के स्वर्णिम दौर
की लोकप्रियता बयां करते है 1991 की यादें ताज़ा हो गयी है उस समय "महाबली शाका और तिलस्मी तावीज" कॉमिक्स रिलीज हुई थी
चार रुपए में मैंने वो कॉमिक्स खरीद ली और उसको लेकर मैं स्कूल चला गया,बदकिस्मती देखो मेरी टीचर ने वो कॉमिक्स मेरे स्कूल बैग में देख ली और मुझ से छीन ली, स्कूल की छुट्टी होने के बाद इस शर्त पर वो कॉमिक्स मुझे वापिस कर दी की आगे से कॉमिक्स स्कूल में लेकर मत आना बाद में उस कॉमिक्स को मैंने बेच दिया अब फिर से उस कॉमिक्स की याद आयी तो
फिर से उसे सर्च किया संयोग से मयंक गोयल भाई के सौजन्य से
वो मेरे संग्रह में फिर से वापिस आ गयी अब वो फिर से मेरे कलेक्शन में है और वन ऑफ मेरी फेवरेट है अब विकास दास जी वाले महाबली शाका कलेक्शन की तो बराबरी तो हो नहीं सकती उनका महाबली शाका का संग्रह बेजोड़ है बिल्कुल उन्हीं की तरह
अमित आनंद जी की "नागराज और बुगाकू से जुड़ी यादें"
अमित आनन्द जी की कलम से बचपन की यादें................
नागराज और बुगाकु (वर्ष 1992 अगस्त)
बात सन् 1992 की है जब मेरे पापा राँची मेरे लिए कॉमिक्स लाया करते थे। आज वो मेरे साथ नहीं हैं, पर उनकी लाई हुई कॉमिक्स और वो बचपन वाले दिन की यादें हैं। स्पष्ट शब्दों में कहा जाय तो नागराज मतलब प्रताप मुलीक जी, उन्होने ने नागराज के कवर में अपने सजीव चित्रांकन और जीवंत चित्राकन से बच्चों को अपना चहेता बना दिया। बात 1992 की है जब नागराज और दुगाकु के विज्ञापन उस समय का सबसे प्रसिद्ध विज्ञापन माना जाता है। जब घर में हमलोग ची०सी०आर० से कोई फिल्म देखते थे, वो विज्ञापन बीच में आ जाने से पता नहीं क्यों एक जोब सा आ जाता था। तो बात उन दिनों की करें जब 'नागराज और बुगाकु' कॉमिक्स प्रकाहित हुई। ये कॉमिक्स इतनी प्रसिद्ध हुई लगभग हर स्कूल में लंच टाइम में ये कॉमिक्स एक बुक के अन्दर रखकर हमलोग पढ़ते थे। फिर मैंने अपने पापा से जिंद करके ये कॉमिक्स मंगाई और जब वो कॉमिक्स घर में आई में रातभर सो नहीं पाया ये कॉमिक्स इतनी अच्छी लगी मुझे उस समय नागराज और राज कॉमिक्स का बहुत क्रेज था। ध्रुव भी बहुत पोपुलर था लेकिन नागराज की जगह और प्रताप मुलिक जी की जगह लेने वाला कोई नहीं था। नागराज और बुगाकु को क्रेज उस समय इतना था जो कि शब्द कम पड़ जाय बच्चों बच्चों की जुबान पर
वैसे नागराज की सारी जेनरल कॉमिक्स मेरी सबसे पसंदीदा और मेरे कलेवान में अभी भी है जो किसी अनमोल नगीने से कम नहीं है। प्रतीप मुलीक जी, चन्दु जी, संजय अष्टपुत्रे जी, विनय जी और मिलींद मुलिक जी को मैं धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होने मेरे बचपन को इतनी सारी कॉमिक्स की यादें जी जो अभी तक मेरे दिल के करीब हैं, और कॉमिक्स ही मेरा पहला प्यार है।
अमित आनंद जी की कलम से
Tuesday, March 7, 2023
नागराज के अपराध उन्मूलन सफर की स्थायी साथी (सौडांगी)
राजेश जैसवाल जी की कलम से
सहपाठियों!!!....देखिये....समझिये.....जानिए.....अब यहाँ पर मंथन करने वाली बात यह है कि क्लासिक नागराज सौडांगी के शक्ति के प्रभाव का वर्णन अपने मुख द्वारा कर रहा है जो अपने आप मे विलक्षण है----जो पढ़ना या दिख जाना अपने आप मे ही दुर्लभ है --कहने का तात्पर्य यह है कि जो एक प्रकार से पूर्णतया शक्तिशाली है वह खुद सौडांगी को "महत्वपूर्ण" बता रहा है और साथ में उसके युद्ध मे उसे विजय दिलाने में सौडांगी का बहुत बड़ी भूमिका रही।क्या इसी को समझदारी के साथ सही बुद्धिमानी माने या बोले या समझे क्लासिक नागराज को ....की वो भी भय नही है क्लासिक नागराज को मैं छोटा दिखूंगा या मेरे छवि को चोट पहुंचेगी आदि आदि!
बंधुओं यही बात क्लासिक नागराज की भाती थी।कोई ड्रामा नही कोई लंबा भाषण नही कोई उल जुलूल तर्क नही बस जो बात सही हैं उसे रखना है जब बात सही हो तो रखो बस इसलिये क्लासिक नागराज हिट सुपरहिट रहती थी।आर्टवर्क और कहानी और उसकी दिशा काफी सधी और सटीक रहती थी।विषय को घुमाकर नही सीधे रखा जाता था।
क्लासिक नागराज और सफर करते करते,आतंकियों को कलग्रास में उछालते हुए नागराज उस बिंदु पर टिक गया जहाँ पर आगे क्या होगा ये बात सिर्फ काल के गर्त के छिया हुआ है।हर शताब्दी,हर युग,हर कालचक्र,हर युद्ध मे आदि में ऐसी घटना होती है जहां पर एक ऐसी व्यक्तित्व की उत्तपत्ति होती है जो है साधारण जानने में परंतु उसकी भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है।वो व्यक्तित्व हर घटना,स्थान,समय मे बस दिख रहा होता है पर उसका एक कदम हर महानायक को उसकी भाग्य से मिलाने का काम करता है------और वह रहस्यमय छवि है जो साधारण है पर उसकी कल्पना भी साधारण ही समझ कर शत्रुओं को भी भ्रम हो गया-------और फिर शत्रुओं का नाश तय हो चूका था।........सौडांगी........ सही सोचा आपने जिसने असाधारण क्षमता और अकल्पनीय सोच को क्रियान्वित किया और नागराज को विजय मार्ग पर प्रशस्त किया जो कि पराजय में बदलनेवाली थी।यह है सौडांगी जिसके बारे में कोई भी दुर्दन्त अपराधी नही सोचता है पर चोट सौडांगी देती है।सौडांगी नागराज की वो हथियार है जो एक सेनापति की तरह क्रियान्वयन रहती है पर उसका इतिहास कोई नही जान पाता है----जो कि एक ही इतिहास है नागराज के शत्रुओं का अंत।अस्त्र दिखते नही है पर उसका उपयोग समय ही होता है वह शस्त्र सौडांगी है!...👍😊
क्लासिक नागराज कभी शो ऑफ नहीं करता था ।।
देवराज शर्मा जी की कलम से
हमारे क्लासिक नागराज ने कभी अपनी शक्ति को किसी के सामने नुमाइश नही किया...चलिए याद करते है कुछ पल
नागराज की कब्र
रोमो कहता है कि आप उस्ताद हो
नागराज और शांगो
तिकाशी कहती है कि मैंने तुम्हारे हाथों से सांप निकलते देखे थे तो नागराज बोलता है कि तुमने सपना देखा होगा
खूनी खोज का तो आपने इसी पोस्ट में दिखा दिया
खूनी जंग
मेरी शक्तियां किसी सावर्जनिक प्रदर्शन की चीज नही है
खूनी कबीला
पोमा कहता है कि आप कोई जादूगर हो और नागराज सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाता है
बच्चो के दुश्मन
टोनी प्यारे आंखे खोलो.....टोनी कहता है क्या हम जिंदा है ?
जादूगर शाकुरा
तीनो सुपर शक्तियां सोचती है कि अलबानो हमारे कारण मरा है लेकिन नागराज के जहर की वजह से वो मरता है और खुद नागराज कुछ बोलने की जगह सिर्फ मुस्कुराता है
ताजमहल की चोरी
सबसे ग्रेट सीन जब नागराज एक मुक्केबाज को फुंकार से मार देता है तो सर् रॉबर्ट उर्फ शाकुरा सबसे कहता है कि नागराज असाधारण शक्तियों का स्वामी है..….विलेन खुद भी उसकी शक्तियों से आतंकित है
ऐसी कितनी ही घटनाएं है क्लासिक नागराज की हर एक कॉमिक्स में, जिनको बयान करना यहां असंभव है ।।
Friday, March 3, 2023
क्लासिक नागराज हमारी पहली और आखिरी चॉइस ❤️
आर विवेक आर जे जी की कलम से
क्लासिक नागराज हमको बहुत पसंद है।।
और वो ही हमारी पहली और आखिरी चॉइज रहेगा।
उसके कई कारण है।
लेकिन एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारण जो है वो है किसी भी पुराने क्लासिक नागराज की कॉमिक्स के कवर।।
उन कवर में क्लासिक नागराज एक योद्धा,एक सुपर हीरो की नजर आता था। जो दुश्मनों को धूल चटा देता था। जो दुश्मनों को नाकों चने चबवा देता था। जिसकी आने वाली कॉमिक्स के विज्ञापन ही इतनी धूम से आते थे कि उस समय हम सभी कॉमिक्स की दुकानों के चक्कर लगा लगा के भी नही थकते थे।।
और दुकानों पे एक मेला सा लगा रहता था।।
दुश्मन कितना भी मजबूत हो नागराज कभी हार नही मानता था। लेकिन।
लेकिन।
लेकिन।
बाद के कवर।।
बाद के ज्यादातर कवर में नागराज को पीटते हुए, कुटते हुए,कुचलते हुए,दबोचते हुए, काटते हुए, मरते हुए, दिखाया गया।।
इतनी बार नागराज को कवरो पे काटा गया,नोचा खसोंटा गया कि बेचारा नागराज बिलकुल ही असहाय सा नजर आने लगा। बेचारे की इतनी मिट्टी पलीद दी कि अब नागराज दुश्मनों के सामने आने से भी घबराने लगा।
और पाठक नागराज की कॉमिक्स पढ़ने से घबराने लगे।
( 2004 के बाद से कॉमिक्स की सेल में गिरावट 80% तक हो चुकी थी) एक तरीके से श्राप लगा कॉमिक्स जगत को।।
जिस नागराज की बदौलत भारत में कॉमिक्स का उदय हुआ ज्ञात रहे नागराज इंडियन कॉमिक्स जगत का और एक खास पब्लिकेशन का मजबूत स्तंभ है और उसी नागराज की बदौलत कॉमिक्स को इंडिया में पहचान मिली उसी नागराज की इतनी दुर्गति कभी नही हुई थी।
आज कल जो NNN नागराज के कवर आ रहे है। उनमें कई में NNN नागराज एक योद्धा की तरह ही दिखाया जा रहा है खास कर संजय गुप्ता जी की आदि पर्व सीरीज में।
और ये देख के बहुत ही खुशी होती है कि अब नागराज को कोई काट पीट नही रहा ,कोई कुचल नही रहा।
बस ऐसे ही हमारे नागराज को हर कवर पे एक योद्धा के रूप में दिखाया जाए ।।।।
Thursday, March 2, 2023
जब सम्पूर्ण विश्व के रक्षक को केवल महानगर का रक्षक बना दिया गया ।।
नागराज तो वही था जिसके आने से पहले आते थे उसके साँप
नागराज तो वो ही था जो किसी एक क्षेत्र का ना होकर पुरे विश्व का था जिसे सिर्फ महानगर की ही चिंता नहीं चिंता थी पुरे विश्व की , जिसका नाम ही काफी था विश्व के अपराधियों में तहलका मचाने को, जो दुश्मनों को दुश्मनों के गढ़ में घुस कर मारता था । “कुंग्फू” मार्शल आर्ट का महारथी । अपराधियों का काल, यमराज, एक बात मुझे कभी समझ में नहीं आयीं जो नागराज मानवता की भलाई के लिये नागद्वीप का शासक होने के बावजूद कभी नागद्वीप में नहीं रुका और जिसने अपनी अपराध उन्मूलन की विश्वयात्रा जारी रखी फिर महानगर में ऐसा कौन सा अपराध से लबालब दरिया बह रहा था जो उसे हमेशा के लिये महानगर में शिफ्ट होना पड़ा । जब नागराज पुरे विश्व की रक्षा कर सकता है तो क्या कोई दूसरा सुपरहीरो अपने क्षेत्र के साथ- साथ महानगर की रक्षा नहीं कर सकता ? कई मित्रों को लगता है नागराज की विश्वयात्रा वाला फ़्लेवर पुराना हो गया था उन्हें मज़ा ही नहीं आ रहा था । इसलिये नागराज की कहानी में बदलाव किये गये डोगा ,परमाणु और भी अन्य सुपरहीरोज इतने सालों से अपने उसी क्षेत्र की रक्षा कर रहे जैसे वो करते आये है उन्हें तो बदलाव की जरुरत नहीं पड़ी और वैसे भी महानगर , राजनगर , कबाड़नगर, नगर कोई भी हो अपने क्षेत्र की रक्षा तो सभी सुपरहीरोज करते हैे ।
इतने सुपरहीरोज की भीड़ में नागराज ही एकमात्र ऐसा सुपरहीरो था जिसके मजबूत कंधो पर सम्पूर्ण विश्व की सुरक्षा का दायित्व था , जो पूरी दुनियां घूमकर अपराध और आतंकवाद को ख़त्म करता था । क्या उसके चरित्र, अतीत , कहानियों के साथ छेड़छाड़ की जरूरत थी कुछ मित्रों का कहना था " उसे ठहराव की जरुरत थी उसकी भी अपनी निजी ज़िन्दगी है" तो भाई वो एक सुपरहीरो है सुपरहीरो की ज़िन्दगी लोभ, मोह ,माया इन सब चीजों से परे होती है , एक सुपरहीरो का पूरा फोकस अपने काम और अपने लक्ष्य पर होता है , " क्या नागराज को गुप्त रुप की जरुरत थी ? " जब सुपर कमांडो ध्रुव बिना किसी सुपर पावर के ,बिना किसी गुप्त रुप के राजनगर में रह सकता है तो नागराज की शक्तियां तो अनंत है उसे गुप्त रुप की क्या जरूरत है , ध्रुव का तो पुरा परिवार भी है और नागराज का तो अपना सगा कोई नहीं है । उसकी पूरी फैमिली उसके शरीर के अंदर है ।
Wednesday, March 1, 2023
बाजों का ट्रेनर "बाजूली"
एक समय था जब नागराज के खलनायक, प्रतिद्वंद्वी सुपरपावर से लैस नहीं होते थे। पर मुकाबला जोरदार होता था , टक्कर जबरदस्त होती थी , एक साधारण सा दिखने वाला विलेन भी एक अमिट छाप छोड़ जाता था,उस समय 32 पृष्ठों की संख्या ही काफी होती थी पाठकों को रोमांच की एक अलग दुनियां में ले जाने के लिये।
खैर वो समय अलग था, वो दौर अलग था, वो कॉमिक्स के प्रति दीवानगी अलग थी , वो नागराज अलग था , वो नागराज की कहानी अलग थी ।
अब न वो नागराज है, ना वो कहानी है ना पब्लिक नागराज की अब उतनी बड़ी दीवानी है ।
अब बाजों के ट्रेनर बाजूली को ही ले लो नागराज का दमदार प्रतिद्वंद्वी, जिसमें इक्यावन पहलवानों की ताकत थी , जिससे नागराज टक्कर रोमांचक और तूफानी थी |
नागराज और बुगाकू
Chaman Kumar जी की कलम से
"नागराज और बुगाकू "
ध्रुव और नागराज का ये अविस्मरणीय विशेषांक मुझे आज भी अतिप्रिय है
राज कॉमिक्स के प्रथम टू इन वन विशेषांक "नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव " की अपार सफलता के बाद पाठकों की ज़बरदस्त डिमांड को देखते हुए RC ने दोबारा ध्रुव और नागराज को पुनः एक साथ प्रस्तुत किया इस विशेषांक "नागराज और बुगाकू" में , इसके प्रचार (ad ) ने ही पाठकों में खलबली मचा दी , उस समय फिल्मो की वीडियो कैसेट्स में भी फिल्म के बीच बीच में इसका एड आ रहा था {उस एड में कुछ यूं था, सीन के साथ एक गूँजती हुई वज़नदार आवाज़ ' नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की अपार सफलता के बाद , एक बार फिर नागराज और ध्रुव एक साथ !!! राज कॉमिक्स पेश करते हैं एक और शाहकार "नागराज और बुगाकू" एक ऐसा खूनी मुक़ाबला जिसमे नागराज और ध्रुव के सामने हैं कई खतरनाक दुश्मन और और और एक अनोखी शक्ति 'बुगाकु "!!! शीघ्र प्रकाशित हो रहा है} आखिर सेट प्रकाशित हुआ, और देखते ही देखते इसने सफलता के पिछले सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए , उस समय इसका मूल्य मात्र १५ रूपए था ,(RC के अनुसार इसकी तीन माह में पूरे भारत में लगभग ६ लाख प्रतियां हाथों हाथ बिक गयी, यानि इसकी सफलता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाठक हर माह इस कॉमिक्स के लिए ३० लाख रूपए खर्च कर रहे थे ) मेरे पास इस सेट की लगभग २०-२५ लोगों की advance बुकिंग थी इसलिए मैंने इस सेट की ४ प्रतियां मंगाई, और ये मुझे भी बड़ी मिन्नत से और डीलर से पुराने सम्बन्ध होने कारन मिल सकी, वैसे उस दिन तो मैंने तीन प्रतियों को पाठकों को किराये पर दे दिया उस समय १ कॉमिक्स १ घंटे के लिए और पूरा सेट ४ घंटे के लिए किराये पर दिया जाता था , नए पाठको या जिन्हे हम जानते नहीं उन्हें दुकान पर बैठा कर पढ़वाते थे, इसलिए सेट की एक प्रति मैंने रोक ली थी किन्तु मैं स्वयं "बुगाकू" पढ़ने के लिए लालायित हो रहा था,इसलिए उसे पढ़ने बैठ गया !!! वाह क्या बढ़िया कहानी थी, थोडांगा और मिस किलर जैसे दो दिग्गज खलनायक और उनकी संयुक्त शक्ति से निर्मित एक अनोखी शक्ति बुगाकु जो की लड़ाई के सभी दांव पेचों में माहिर था और नागराजा वासुकि की खडग प्राप्त करके तो लगभग अजेय ही हो गया था ,और उसके अलावा कॉमिक्स का वो पंच जिसमे ध्रुव के पुराने सभी दुश्मनो से मुठभेड़ !! हालाँकि वे सब नकली थे और मिस किलर ने उन्हें अपनी मशीन से निर्मित किया था किन्तु फिर भी मज़ा बहुत आया, कहानी का अंत भी काफी मज़ेदार था , थोडांगा के जंगली लड़ाके सूरमाओं से जोरदार टक्कर, ध्रुव और नागराज को अपनी जान पर खेलना पढ़ा , थोडांगा, मिस किलर, और बुगाकू जैसे दिग्गजों को हराने के लिए !!,
वाकई में पुराने दौर और पुरानी कॉमिक्सों की यादें आज भी बचपन में ले जाती हैं और पूरा बचपन एक चलचित्र की भांति मस्तिष्क पटल पर जीवंत हो उठता है..
सम्पूर्ण विश्व का रक्षक हमारा विश्व रक्षक नागराज
नागानंद, नागनाथ- कमबख्त Vikas Das जी फेवरेट लेखक (घमंडी) ने निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी नाग थे काम के🙃
नागानंद , नागनाथ जो कभी नागराज के राइट, लेफ्ट हैंड हुआ करते थे उन्हें बिल्कुल दरकिनार( साइड) कर दिया गया, उनकी जगह अब शीतनाग, नागू ले चुके थे, बाबा गुरुगोरखनाथ जो हमेशा नागराज की परछाई की तरह उसके साथ चलते थे उनकी जगह अब वेदाचार्य, कालजयी ले चुके थे, इतना ही नहीं नागराज का भूत, भविष्य, वर्तमान सब कुछ बदल दिया गया था
उसका चरित्र देखने सोचने सब का तरीका बदल चुका था पूरी दुनियां का रक्षक जो सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करता था, वो अब खुद अपनी पहचान छुपाकर महानगर का शरणार्थी था अब आधे टाइम इस सम्पूर्ण विश्व के रक्षक की रक्षा सुपर कमांडो ध्रुव ,भारती,कमांडो फोर्स और वेदाचार्य कर रहे थे, ये वो है ही नहीं यार ये अलग है अपने वाला अलग था ,वो वन मैन आर्मी था जिसकी पूरी फोर्स उसके शरीर के अंदर थी ,जो दुश्मन के घर में घुसकर उसकी बखिया उधेड़ता था, जो मानवता की रक्षा के लिये हमेशा सफर में रहता , Vikas Das D जी Amit Anand जी और उनके बड़े मौसरे चचेरे भाइयों की यादों में सिर्फ इसी नागराज का जिक्र है क्लासिक नागराज का❤️🙏
Saturday, January 7, 2023
यादें नागराज की शानदार कॉमिक्स खूनी जंग की
Devraj Sharma जी की कलम से
दोंस्तो खूनी जंग कॉमिक्स का एक फ्रेम याद आ रहा है जिसमें डिसिल्वा नाम का एक फाइट आयोजक नागराज को आफर देता है कि मेरे लिए लड़ो, मैं तुमको तगड़ा वेतन दूंगा......तब नागराज का सिर्फ एक ही जबाब था "मैं किसी की नौकरी नही करता मिस्टर डिसिल्वा" कहने को सिर्फ ये एक फ्रेम था लेकिन इसमें नागराज का एक शक्तिशाली व्यक्तित्व और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाला एक जिंदादिल इंसान दिखाया है....और आज ??
और आज वही नागराज अपने खुद के न्यूज़ चेंनल में एक अदना सा मुलाजिम बना हुआ है और डरा डरा सा रहता है, कोई भी ऐरा गैरा उसका मजाक उड़ा कर चला जाता है
लेखक को कोई हक नही था ऐसे सुपर हीरो के साथ छेड़छाड़ करने का जो अपने आप में ओरिजनल था और शायद इंडिया का पहला सुपरहीरो था जो किसी भी विदेशी सुपरहीरो की 1 % भी नकल नही था ।।
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